Chapter 6 · Grammar
प्रत्यय — कृत् (अव्यय वाले)
Krit Suffixes: Ktva, Lyap, Tumunशब्द या धातु के बाद जुड़कर नया शब्द बनाने वाला अंश प्रत्यय है। मूल भाग = प्रकृति। भेद: कृत् (धातु के बाद: पठ् + तुमुन् = पठितुम्) · तद्धित (संज्ञा/विशेषण के बाद: धन + मतुप् = धनवान्) · स्त्री प्रत्यय (पुंलिङ्ग से स्त्रीलिङ्ग: अज + टाप् = अजा)। प्रत्यय का कुछ भाग हट जाता है (इत्), जैसे क्त्वा → त्वा, तुमुन् → तुम्, ल्युट् → अन।
क्त्वा → त्वा"करके" (पूर्वकालिक क्रिया) · धातु से पहले उपसर्ग नहीं · अव्यय · सूत्र: समानकर्तृकयोः पूर्वकाले
ल्यप् → य"करके", पर धातु से पहले उपसर्ग हो · अव्यय · सूत्र: समासेऽनञ्पूर्वे क्त्वो ल्यप् (नञ् हो तो नहीं: अकृत्वा)
तुमुन् → तुम्"के लिए" (प्रयोजन) · अव्यय · सूत्र: तुमुन्ण्वुलौ क्रियायां क्रियार्थायाम् · काल/इच्छा शब्द के साथ भी: भोक्तुं कालः
| धातु | क्त्वा | तुमुन् | धातु | क्त्वा | तुमुन् | धातु | क्त्वा | तुमुन् |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पठ् | पठित्वा | पठितुम् | गम् | गत्वा | गन्तुम् | कृ | कृत्वा | कर्तुम् |
| दृश् | दृष्ट्वा | द्रष्टुम् | पा | पीत्वा | पातुम् | स्था | स्थित्वा | स्थातुम् |
| भू | भूत्वा | भवितुम् | ज्ञा | ज्ञात्वा | ज्ञातुम् | श्रु | श्रुत्वा | श्रोतुम् |
| दा | दत्त्वा | दातुम् | लभ् | लब्ध्वा | लब्धुम् | नी | नीत्वा | नेतुम् |
| वच् | उक्त्वा | वक्तुम् | ग्रह् | गृहीत्वा | ग्रहीतुम् | भुज् | भुक्त्वा | भोक्तुम् |
| त्यज् | त्यक्त्वा | त्यक्तुम् | लिख् | लिखित्वा | लेखितुम् | खाद् | खादित्वा | खादितुम् |
| हस् | हसित्वा | हसितुम् | चल् | चलित्वा | चलितुम् | स्मृ | स्मृत्वा | स्मर्तुम् |
ल्यप् — उपसर्ग + धातु
| उपसर्ग + धातु | ल्यप् रूप | उपसर्ग + धातु | ल्यप् रूप | उपसर्ग + धातु | ल्यप् रूप |
|---|---|---|---|---|---|
| आ + गम् | आगत्य, आगम्य | प्र + नम् | प्रणम्य | उप + विश् | उपविश्य |
| आ + दा | आदाय | प्र + दा | प्रदाय | वि + ज्ञा | विज्ञाय |
| उत् + स्था | उत्थाय | आ + नी | आनीय | प्र + विश् | प्रविश्य |
| वि + हस् | विहस्य | सम् + पूज् | सम्पूज्य | नि + क्षिप् | निक्षिप्य |
| उप + कृ | उपकृत्य | आ + हृ | आहृत्य | वि + स्मृ | विस्मृत्य |
क्त्वा या ल्यप्? उपसर्ग है → ल्यप् (प्रणम्य ✔, प्रणत्वा ✘) · उपसर्ग नहीं → क्त्वा (नत्वा ✔) · नञ् (अ) हो तो क्त्वा ही: अकृत्वा, अदत्त्वा। ह्रस्व स्वर वाली धातु में ल्यप् से पहले त् जुड़ता है (ह्रस्वस्य पिति कृति तुक्): उपकृत्य, आहृत्य, विजित्य।
तुमुन् का रूप = तृच् का रूप − आ + उम्: कर्ता → कर्तुम् · द्रष्टा → द्रष्टुम् · दाता → दातुम् · श्रोता → श्रोतुम्। ज़्यादातर क्त्वा का रूप = क्त − अः + त्वा: गतः → गत्वा · दृष्टः → दृष्ट्वा · पीतः → पीत्वा · स्थितः → स्थित्वा।
"पठित्वा में प्रत्यय?" (क्त्वा) · "आगत्य / उपविश्य में प्रत्यय?" (ल्यप्) · "द्रष्टुम् = ?" (दृश् + तुमुन्) · "'आदाय' का प्रकृति-प्रत्यय?" (आ + दा + ल्यप्) · "प्र + नम् + ल्यप् = ?" (प्रणम्य) · "रिक्त स्थान: बालकः ___ गच्छति (पढ़ने के लिए)" (पठितुम्) · "इनमें ल्यप् नहीं" (गत्वा)
प्रत्यय — कृत् (विशेषण और संज्ञा वाले) Kta, Ktavatu, Shatri, Shanach, Tavyat…
| प्रत्यय (शेष) | अर्थ / प्रयोग | पुं. · स्त्री. · नपुं. | और उदाहरण |
|---|---|---|---|
| क्त (त) | भूतकाल; सकर्मक में कर्मवाच्य, अकर्मक/गति अर्थ में कर्तृवाच्य | पठितः · पठिता · पठितम् | गतः, कृतः, दृष्टः, पीतः, स्थितः, ज्ञातः, श्रुतः, दत्तः, लब्धः, उक्तः, गृहीतः, भुक्तः, सुप्तः, हतः |
| क्तवतु (तवत्) | भूतकाल, कर्तृवाच्य ("ने … किया") | पठितवान् · पठितवती · पठितवत् | गतवान्, कृतवान्, दृष्टवान्, पीतवान्, उक्तवान्, लब्धवान् |
| शतृ (अत्) | "…ता हुआ", परस्मैपदी धातु | पठन् · पठन्ती · पठत् | गच्छन्, पश्यन्, तिष्ठन्, पिबन्, भवन्, कुर्वन् (स्त्री. कुर्वती), धावन्, लिखन् |
| शानच् (आन / मान) | "…ता हुआ", आत्मनेपदी धातु | लभमानः · लभमाना · लभमानम् | सेवमानः, वर्धमानः, वन्दमानः, मोदमानः, कुर्वाणः, शयानः, आसीनः |
| तव्यत् (तव्य) | "चाहिए / योग्य"; कर्ता तृतीया में | पठितव्यः · पठितव्या · पठितव्यम् | कर्तव्यम्, गन्तव्यम्, द्रष्टव्यम्, पातव्यम्, दातव्यम्, श्रोतव्यम्, वक्तव्यम् |
| अनीयर् (अनीय) | "चाहिए / योग्य" (तव्यत् का ही अर्थ) | पठनीयः · पठनीया · पठनीयम् | करणीयम्, गमनीयम्, दर्शनीयम्, पानीयम्, दानीयम्, श्रवणीयम्, स्मरणीयम् |
| ण्वुल् (अक) | करने वाला (कर्ता); पहले स्वर की वृद्धि | पाठकः · पाठिका | कारकः, नायकः, गायकः, लेखकः, पालकः, पावकः, सेवकः, याचकः, दायकः |
| तृच् (तृ) | करने वाला (कर्ता) | कर्ता · कर्त्री (ङीप्) | दाता, नेता, श्रोता, वक्ता, द्रष्टा, हर्ता, गन्ता, पठिता |
| ल्युट् (अन) | भाव (क्रिया का नाम) — नपुंसकलिङ्ग; करण/अधिकरण अर्थ में भी | पठनम् | गमनम्, करणम्, दर्शनम्, पानम्, स्थानम्, भवनम्, श्रवणम्, दानम्, भोजनम्, नयनम्, शयनम् |
क्तक्तवतू निष्ठा · निष्ठा (भूते) · लटः शतृशानचावप्रथमासमानाधिकरणे · तव्यत्तव्यानीयरः (कृत्याः) · ण्वुल्तृचौ · युवोरनाकौ (यु → अन, वु → अक) · ल्युट् च
क्त / क्तवतु पहचान: रामेण ग्रन्थः पठितः (क्त, कर्म के लिङ्ग में) · रामः ग्रन्थं पठितवान् (क्तवतु, कर्ता के लिङ्ग में) · सीता पठितवती। शतृ और शानच् विशेष्य के लिङ्ग-विभक्ति-वचन में: गच्छन्तं बालकं पश्य। ल्युट् से बने शब्द हमेशा नपुंसक।
तृच् के रूप पितृ जैसे नहीं, दातृ जैसे चलते हैं: कर्ता, कर्तारौ, कर्तारः (पितरौ नहीं)। ण्वुल् में आकारान्त धातु पर य् जुड़ता है: दा → दायकः, गै → गायकः।
शतृ के प्रथमा पुं. एक. में -न्: पठत् → पठन्, गच्छत् → गच्छन् · स्त्री. में -न्ती: पठन्ती, गच्छन्ती (भ्वादि, दिवादि, चुरादि; तुदादि में दोनों: तुदती / तुदन्ती) · कृ में कुर्वती।
"गतवान् में प्रत्यय?" (क्तवतु) · "लभमानः में प्रत्यय?" (शानच्) · "पठन् का स्त्रीलिङ्ग?" (पठन्ती) · "करणीयम् में प्रत्यय?" (अनीयर्) · "द्रष्टव्यम् = ?" (दृश् + तव्यत्) · "गायकः = ?" (गै + ण्वुल्) · "नेता = ?" (नी + तृच्) · "दर्शनम् में प्रत्यय?" (ल्युट्) · "'चाहिए' अर्थ वाले प्रत्यय?" (तव्यत्, अनीयर्)
प्रत्यय — तद्धित, स्त्री प्रत्यय, पहचान Taddhita & Stri Pratyaya
| तद्धित | अर्थ / नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| मतुप् (मत् / वत्) | "वाला" (तदस्यास्त्यस्मिन्निति मतुप्)। अ/आ-अन्त शब्द या म-उपधा में म → व (मादुपधायाश्च मतोर्वोऽयवादिभ्यः)। पुं. प्र.: -मान् / -वान् · स्त्री.: -मती / -वती | मत्: बुद्धिमान्, श्रीमान्, धीमान्, आयुष्मान्, गोमान् · वत्: धनवान्, गुणवान्, बलवान्, विद्यावान्, भगवान्, लक्ष्मीवान् · बुद्धिमती, गुणवती |
| ठक् / ठञ् (इक) | "सम्बन्धी, करने वाला" — ठ → इक (ठस्येकः) और पहले स्वर की वृद्धि (अ → आ, इ/ए → ऐ, उ/ओ → औ) | धर्म → धार्मिकः · समाज → सामाजिकः · इतिहास → ऐतिहासिकः · वेद → वैदिकः · लोक → लौकिकः · शरीर → शारीरिकः · वर्ष → वार्षिकः · दिन → दैनिकः · भूगोल → भौगोलिकः · मास → मासिकः |
| त्व | भाव ("-पन") — नपुंसकलिङ्ग (तस्य भावस्त्वतलौ) | लघुत्वम्, गुरुत्वम्, मनुष्यत्वम्, देवत्वम्, बालकत्वम्, महत्त्वम्, पात्रत्वम् |
| तल् (ता) | भाव — स्त्रीलिङ्ग (तलन्तं स्त्रियाम्) | लघुता, गुरुता, मनुष्यता, देवता, मूर्खता, सुन्दरता, महत्ता, पात्रता, जनता |
स्त्री प्रत्यय
| प्रत्यय | नियम (सूत्र) | उदाहरण |
|---|---|---|
| टाप् (आ) | अकारान्त शब्द और अजादि गण (अजाद्यतष्टाप्) | अज → अजा · बाल → बाला · अश्व → अश्वा · छात्र → छात्रा · शिष्य → शिष्या · प्रिय → प्रिया · सुत → सुता · कोकिल → कोकिला · मूषिक → मूषिका |
| टाप् (अक → इका) | प्रत्यय के "क" से पहले अ → इ (प्रत्ययस्थात् कात् पूर्वस्यात इदाप्यसुपः) | बालक → बालिका · पाठक → पाठिका · सेवक → सेविका · गायक → गायिका · लेखक → लेखिका |
| ङीप् (ई) | ऋकारान्त, नकारान्त (ऋन्नेभ्यो ङीप्) · उगित् (मतुप्, शतृ, भवत् — उगितश्च) · पहली अवस्था (वयसि प्रथमे) · टित् शब्द | कर्तृ → कर्त्री · दातृ → दात्री · नेतृ → नेत्री · राजन् → राज्ञी · भवत् → भवती · श्रीमत् → श्रीमती · गुणवत् → गुणवती · पठत् → पठन्ती · कुमार → कुमारी · नद → नदी |
ङीप् और ङीष् अलग हैं: गौर → गौरी, नर्तक → नर्तकी में ङीष् (षिद्गौरादिभ्यश्च) है। दोनों में "ई" बनती है; प्रश्न में विकल्प ध्यान से पढ़ो।
प्रकृति-प्रत्यय विभाग — पहचानो
| शब्द | प्रकृति + प्रत्यय | शब्द | प्रकृति + प्रत्यय | शब्द | प्रकृति + प्रत्यय |
|---|---|---|---|---|---|
| कृत्वा | कृ + क्त्वा | प्रणम्य | प्र + नम् + ल्यप् | गन्तुम् | गम् + तुमुन् |
| श्रुतः | श्रु + क्त | दृष्टवान् | दृश् + क्तवतु | पश्यन् | दृश् + शतृ |
| वर्धमानः | वृध् + शानच् | पानीयम् | पा + अनीयर् | कर्तव्यम् | कृ + तव्यत् |
| नायकः | नी + ण्वुल् | दाता | दा + तृच् | गमनम् | गम् + ल्युट् |
| धनवान् | धन + मतुप् | सामाजिकः | समाज + ठक् | लघुता | लघु + तल् |
| गुरुत्वम् | गुरु + त्व | बालिका | बालक + टाप् | नेत्री | नेतृ + ङीप् |
"बुद्धिमान् में प्रत्यय?" (मतुप्) · "वैदिकः = ?" (वेद + ठक्) · "लघुता में प्रत्यय?" (तल्) · "मनुष्यत्वम् किस लिङ्ग में?" (नपुं.) · "अजा में स्त्री प्रत्यय?" (टाप्) · "कर्तृ का स्त्रीलिङ्ग?" (कर्त्री, ङीप्) · "बालक + टाप् = ?" (बालिका) · "गुणवत् का स्त्रीलिङ्ग?" (गुणवती)