Chapter 9 · Hindi Grammar
वाक्य — पद, पदबंध, उपवाक्य, अंग, गुण
Sentence: Building Blocks📝 वाक्यशब्दों का वह सार्थक समूह जिससे वक्ता का भाव पूरी तरह समझ आ जाए: "राम विद्यालय जाता है।"
🧩 वाक्य के 2 अंगउद्देश्य (= जिसके बारे में कहा जाए: कर्ता + उसका विस्तार) · विधेय (= उद्देश्य के बारे में जो कहा जाए: क्रिया + कर्म / पूरक + विस्तार)
छोटे से बड़े तक: पद → पदबंध → उपवाक्य → वाक्य
| इकाई | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| पद | वाक्य में प्रयोग हुआ शब्द (विभक्ति / प्रत्यय लगकर व्याकरण से बँधा) | "राम ने फल खाया" — राम ने, फल, खाया = तीन पद |
| पदबंध | कई पद मिलकर एक पद का काम करें; इसमें अपनी पूरी क्रिया नहीं होती। भेद: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण पदबंध | "सबसे तेज़ दौड़ने वाला लड़का जीता" (संज्ञा पदबंध) · "वह पढ़ता रहा होगा" (क्रिया पदबंध) · "बहुत धीरे-धीरे चलो" (क्रियाविशेषण पदबंध) |
| वाक्यांश | शब्दों का समूह जिसका अर्थ तो है पर पूरा भाव नहीं (मुहावरे वाक्यांश होते हैं) | "आँख का तारा" · "सुबह-सुबह" |
| उपवाक्य | जिसमें अपना उद्देश्य और अपनी क्रिया हो, पर वह बड़े वाक्य का हिस्सा हो | "जब वर्षा हुई, तब मोर नाचे" — दोनों भाग उपवाक्य |
| वाक्य | पूरा भाव देने वाला, स्वतंत्र | "वर्षा होने पर मोर नाचे।" |
पदबंध या उपवाक्य? समूह में क्रिया है (हुई, आया, है) → उपवाक्य · क्रिया नहीं, केवल कई शब्द मिलकर एक संज्ञा / विशेषण / क्रियाविशेषण का काम → पदबंध।
| वाक्य | उद्देश्य | विधेय |
|---|---|---|
| मेरा छोटा भाई रोज़ विद्यालय जाता है। | मेरा छोटा भाई (कर्ता: भाई · कर्ता-विस्तार: मेरा छोटा) | रोज़ विद्यालय जाता है (क्रिया: जाता है · क्रिया-विस्तार: रोज़ · स्थान: विद्यालय) |
| परिश्रमी छात्र परीक्षा में सफल हुए। | परिश्रमी छात्र | परीक्षा में सफल हुए (‘सफल’ = पूरक) |
वाक्य के 6 गुण (अच्छे वाक्य की शर्तें)
| गुण | अर्थ | गलत उदाहरण |
|---|---|---|
| सार्थकता | हर शब्द का अर्थ हो | "राम ढपढप खाता है" (‘ढपढप’ अर्थहीन) |
| योग्यता | शब्दों का अर्थ आपस में मेल खाए, बात संभव हो | "वह आग से प्यास बुझाता है" |
| आकांक्षा | अर्थ पूरा हो, कुछ और जानने की इच्छा बाकी न रहे | "राम ने…" (अधूरा) |
| आसत्ति (निकटता) | शब्द पास-पास बोले / लिखे जाएँ, बीच में लंबा अंतर न हो | "राम … (एक घंटे बाद) … खाता है" |
| पदक्रम | शब्द सही क्रम में हों (कर्ता → कर्म → क्रिया) | "खाता फल राम है" |
| अन्वय | लिंग, वचन, पुरुष, काल का आपस में मेल | "लड़कियाँ खेलता है" |
"‘सबसे तेज़ दौड़ने वाला लड़का’ क्या है?" (संज्ञा पदबंध) · "पदबंध और उपवाक्य में अंतर?" (उपवाक्य में क्रिया होती है) · "वाक्य के दो अंग?" (उद्देश्य, विधेय) · "‘वह आग से प्यास बुझाता है’ में कौन-सा गुण नहीं?" (योग्यता) · "‘लड़कियाँ खेलता है’ में किस गुण का अभाव?" (अन्वय)
वाक्य — रचना के आधार पर भेद Simple, Compound & Complex Sentences
🔗 योजकदो शब्दों / उपवाक्यों को जोड़ने वाला शब्द (और, किंतु, क्योंकि, कि…)।
🧱 उपवाक्य के दो प्रकारप्रधान (= अपने-आप पूरा, मुख्य) · आश्रित (= अकेले अधूरा, प्रधान पर टिका)
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सरल (साधारण) | एक उद्देश्य, एक विधेय, एक मुख्य क्रिया | वह मेहनत करके सफल हुआ। · बच्चे खेल रहे हैं। |
| संयुक्त | दो या अधिक प्रधान (स्वतंत्र) उपवाक्य, समानाधिकरण योजक (= बराबर दर्जे को जोड़ने वाले) से जुड़े | उसने मेहनत की और सफल हुआ। · वह गरीब है किंतु ईमानदार है। |
| मिश्र | एक प्रधान + एक या अधिक आश्रित उपवाक्य, व्यधिकरण योजक (= आश्रित बनाने वाले) से जुड़े | जब उसने मेहनत की तब वह सफल हुआ। · मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है। |
समानाधिकरण योजक → संयुक्तऔर, तथा, एवं, व · या, अथवा, किंवा · पर, परंतु, किंतु, लेकिन, बल्कि · इसलिए, अतः, अतएव
व्यधिकरण योजक → मिश्रकि, जो, जिसे, जिसकी · क्योंकि, चूँकि · यदि…तो, जब…तब, ज्यों ही…त्यों ही · यद्यपि…तथापि, चाहे…फिर भी · जैसे…वैसे, जितना…उतना · ताकि, जिससे कि
पहचान की कसौटी: योजक हटा दो — दोनों हिस्से अपने-आप पूरे वाक्य बनें → संयुक्त · एक हिस्सा अधूरा लगे ("जब उसने मेहनत की…") → मिश्र · क्रिया ही एक है → सरल।
मिश्र वाक्य के आश्रित उपवाक्य
संज्ञा उपवाक्यप्रधान वाक्य की क्रिया का कर्म / कर्ता बने; प्रायः ‘कि’ से: "मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है।"
विशेषण उपवाक्यकिसी संज्ञा की विशेषता; जो, जिसे, जिसकी से: "वह लड़का जो कल आया था, मेरा भाई है।"
क्रियाविशेषण उपवाक्यसमय, स्थान, कारण, शर्त; जब, जहाँ, क्योंकि, यदि से: "जब वर्षा हुई तब मोर नाचे।"
प्रश्न: "वह खाना खाकर सो गया" → मुख्य क्रिया एक (सो गया), ‘खाकर’ पूर्वकालिक → सरल · "यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी" → ‘यदि’ वाला भाग अधूरा → मिश्र
"‘मैं जानता हूँ कि वह सच्चा है’ — वाक्य का भेद?" (मिश्र) · "‘वह आया और बैठ गया’?" (संयुक्त) · "रेखांकित उपवाक्य का भेद: ‘जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है’" (विशेषण उपवाक्य) · "‘वह पढ़कर खेलने गया’ का संयुक्त वाक्य?" (उसने पढ़ा और खेलने गया) · "‘क्योंकि’ कौन-सा योजक?" (व्यधिकरण)
वाक्य — अर्थ के आधार पर 8 भेद Sentence Types by Meaning
| भेद (दोनों नाम) | क्या बताता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. विधानार्थक / विधानवाचक | किसी बात का सामान्य होना / कथन | सूर्य पूर्व में उगता है। · वह पढ़ रहा है। |
| 2. निषेधार्थक / निषेधवाचक | काम का न होना (नहीं, न, मत) | मैं आज बाज़ार नहीं जाऊँगा। |
| 3. प्रश्नार्थक / प्रश्नवाचक | प्रश्न पूछा जाए (?) | तुम कहाँ जा रहे हो? |
| 4. आज्ञार्थक / आज्ञावाचक (विधिवाचक) | आज्ञा, अनुरोध, उपदेश | दरवाज़ा बंद करो। · कृपया बैठिए। |
| 5. इच्छार्थक / इच्छावाचक | इच्छा, कामना, आशीर्वाद | भगवान तुम्हें लंबी आयु दे। · तुम्हारी यात्रा सफल हो। |
| 6. संदेहार्थक / संदेहवाचक | संदेह, संभावना (शायद, संभवतः) | शायद आज वर्षा हो। · वह सो गया होगा। |
| 7. संकेतार्थक / संकेतवाचक | एक काम दूसरे पर निर्भर — शर्त (यदि…तो) | यदि तुम पढ़ते तो पास हो जाते। |
| 8. विस्मयादिबोधक | आश्चर्य, हर्ष, शोक (!) | वाह! कितना सुंदर दृश्य है! |
संकेतार्थक या संदेहार्थक? ‘यदि…तो’ (एक बात दूसरी पर टिकी) → संकेतार्थक · ‘शायद, संभवतः, होगा’ (पक्का पता नहीं) → संदेहार्थक। ‘ईश्वर करे / भगवान … दे’ → इच्छार्थक।
अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन
| मूल वाक्य | बदलो | नया वाक्य |
|---|---|---|
| वह ईमानदार है। | निषेधार्थक | वह बेईमान नहीं है। |
| सब यह बात जानते हैं। | प्रश्नार्थक | यह बात कौन नहीं जानता? |
| यह बहुत सुंदर दृश्य है। | विस्मयादिबोधक | वाह! कितना सुंदर दृश्य है! |
| तुम पढ़ते हो। | आज्ञार्थक | तुम पढ़ो। |
| तुम सफल हो। | इच्छार्थक | ईश्वर करे, तुम सफल हो। |
| वह आएगा। | संदेहार्थक | शायद वह आए। |
| मेहनत करो, सफल होगे। | संकेतार्थक | यदि मेहनत करोगे तो सफल होगे। |
प्रश्न: "यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी" — रचना और अर्थ? → रचना: मिश्र (आश्रित उपवाक्य ‘यदि…’) · अर्थ: संकेतार्थक
प्रश्न: "मैं आज नहीं खेलूँगा" → अर्थ: निषेधार्थक · रचना: सरल
प्रश्न: "मैं आज नहीं खेलूँगा" → अर्थ: निषेधार्थक · रचना: सरल
एक वाक्य के दो नाम हो सकते हैं: रचना से (सरल / संयुक्त / मिश्र) और अर्थ से (विधान, निषेध…) — प्रश्न का आधार ध्यान से पढ़ो। पुस्तकों में ‘-अर्थक’ और ‘-वाचक’ दोनों नाम मिलते हैं; अर्थ एक ही है।
"‘भगवान तुम्हारा भला करे’ — अर्थ के आधार पर?" (इच्छार्थक) · "‘शायद वह आज आए’?" (संदेहार्थक) · "‘यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे’?" (संकेतार्थक) · "‘कृपया शांत रहें’?" (आज्ञार्थक) · "अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद?" (8) · "‘वह सच बोलता है’ का निषेधार्थक?" (वह झूठ नहीं बोलता)
वाक्य रूपांतरण — सरल, संयुक्त, मिश्र Transforming Sentences
वाक्य का अर्थ वही रहे, केवल रचना बदले — इसे वाक्य रूपांतरण कहते हैं। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है: "इस वाक्य का संयुक्त / मिश्र रूप चुनो"।
| सरल | संयुक्त | मिश्र |
|---|---|---|
| वह मेहनत करके सफल हुआ। | उसने मेहनत की और सफल हुआ। | जब उसने मेहनत की तब वह सफल हुआ। |
| बीमार होने के कारण वह नहीं आया। | वह बीमार था, इसलिए नहीं आया। | वह नहीं आया क्योंकि वह बीमार था। |
| ईमानदार व्यक्ति का सब सम्मान करते हैं। | वह व्यक्ति ईमानदार है, इसलिए सब उसका सम्मान करते हैं। | जो व्यक्ति ईमानदार है, उसका सब सम्मान करते हैं। |
| सूर्य निकलने पर अँधेरा दूर हो गया। | सूर्य निकला और अँधेरा दूर हो गया। | ज्यों ही सूर्य निकला, त्यों ही अँधेरा दूर हो गया। |
| गरीब होते हुए भी वह ईमानदार है। | वह गरीब है, किंतु ईमानदार है। | यद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है। |
| परिश्रमी छात्र अवश्य सफल होते हैं। | छात्र परिश्रम करते हैं और सफल होते हैं। | जो छात्र परिश्रम करते हैं, वे अवश्य सफल होते हैं। |
सरल → संयुक्त: दूसरी क्रिया को अलग उपवाक्य बनाओ + और / इसलिए / किंतु · सरल → मिश्र: एक भाग को आश्रित उपवाक्य बनाओ + जब…तब, क्योंकि, जो…वह, कि, यद्यपि…तथापि · संयुक्त / मिश्र → सरल: एक क्रिया को -कर / -के कारण / -ने पर / -ते हुए भी रूप में बदलो
प्रश्न: "वह खाना खाकर सो गया" → मुख्य क्रिया एक (सो गया), ‘खाकर’ पूर्वकालिक → सरल
प्रश्न: इसका संयुक्त रूप? → "उसने खाना खाया और सो गया।"
प्रश्न: इसका संयुक्त रूप? → "उसने खाना खाया और सो गया।"
प्रश्न: "जैसे ही घंटी बजी, बच्चे बाहर दौड़ पड़े" का सरल रूप? → "घंटी बजते ही बच्चे बाहर दौड़ पड़े।"
सरल की पहचान: ‘-कर, -के, -ते ही, -ने पर, -ते हुए’ जैसे रूप, पर मुख्य क्रिया एक · संयुक्त: बीच में ‘और / पर / इसलिए / या’ · मिश्र: जोड़ी वाले शब्द ‘जो-वह, जब-तब, यदि-तो, यद्यपि-तथापि’ या ‘कि / क्योंकि’।
"‘वह पढ़कर खेलने गया’ का संयुक्त वाक्य?" (उसने पढ़ा और खेलने गया) · "‘गरीब होते हुए भी वह ईमानदार है’ का मिश्र रूप?" (यद्यपि…तथापि) · "निम्न में मिश्र वाक्य चुनो" · "‘जो परिश्रम करेगा, वह सफल होगा’ का सरल रूप?" (परिश्रमी सफल होगा)
वाक्य शुद्धि — अशुद्धि के प्रकार Sentence Correction
| अशुद्धि | अशुद्ध ✗ | शुद्ध ✓ |
|---|---|---|
| लिंग | दही खट्टी है। · सरकार ने नया नियम बनाई। | दही खट्टा है। · सरकार ने नया नियम बनाया। |
| वचन | मैं आपका दर्शन करने आया हूँ। · उसने दो केला खाया। | मैं आपके दर्शन करने आया हूँ। · उसने दो केले खाए। |
| आदर (सम्मानार्थ बहुवचन) | गुरुजी आया है। · पिताजी कल गया। | गुरुजी आए हैं। · पिताजी कल गए। |
| पुरुष / आदर-संगति | आप जाओ। · तुम चिंता मत कीजिए। | आप जाइए। · तुम चिंता मत करो। |
| ‘प्रत्येक / हर एक’ + एकवचन | प्रत्येक विद्यार्थी अपना काम करें। | प्रत्येक विद्यार्थी अपना काम करे। |
| परसर्ग (कारक चिह्न) | मैंने घर जाना है। · उसने मुझे प्रश्न पूछा। · वह कुर्सी में बैठा है। | मुझे घर जाना है। · उसने मुझसे प्रश्न पूछा। · वह कुर्सी पर बैठा है। |
| ‘ने’ का प्रयोग | राम ने आया। · उसने किताब लाई। | राम आया। · वह किताब लाया (‘लाना’ के साथ ‘ने’ नहीं)। |
| काल-संगति | जब मैं स्टेशन पहुँचा, गाड़ी चली गई है। | …गाड़ी चली गई थी। |
| सर्वनाम | मेरे को पुस्तक चाहिए। · हम हमारे देश से प्रेम करते हैं। | मुझे पुस्तक चाहिए। · हम अपने देश से प्रेम करते हैं। |
| विशेषण | वह सबसे श्रेष्ठतम छात्र है। | वह सर्वश्रेष्ठ छात्र है। |
| पदक्रम | एक फूलों की माला लाओ। | फूलों की एक माला लाओ। |
| पुनरुक्ति (दोहराव) | केवल मात्र दो रुपये · सप्रमाण सहित · अनेकों लोग · दोनों के दोनों · पुनः दोबारा · आज के आधुनिक युग में · सामूहिक रूप से इकट्ठे होकर | केवल दो रुपये · सप्रमाण · अनेक लोग · दोनों · पुनः / दोबारा · आधुनिक युग में · इकट्ठे होकर |
‘ने’ होने पर क्रिया का मेल: मुख्य कर्म के साथ ‘को’ न हो → क्रिया कर्म के लिंग-वचन से (उसने रोटी खाई, उसने फल खाए) · मुख्य कर्म के साथ ‘को’ हो या कर्म न हो → क्रिया पुल्लिंग एकवचन (उसने सीता को बुलाया · राम ने कहा) · ‘ने’ नहीं लगता: अकर्मक क्रिया, अपूर्ण भूत, और लाना, भूलना, सकना, चुकना · अकर्मक होकर भी ‘ने’: नहाना, छींकना, खाँसना, थूकना (उसने छींका)
वाक्य शुद्धि का क्रम: (1) क्रिया का लिंग-वचन कर्ता / कर्म से मिलाओ (‘ने’ हो तो ऊपर का नियम) · (2) आदर वाले कर्ता के साथ बहुवचन क्रिया · (3) परसर्ग सही? · (4) सर्वनाम का रूप (मुझे, अपना) · (5) दोहराव हटाओ · (6) पदक्रम (विशेषण अपनी संज्ञा के पास) · (7) काल दोनों उपवाक्यों में मेल खाए।
प्रश्न: "सीता ने राम को पत्र लिखी।" → ‘ने’ + कर्म ‘पत्र’ (बिना को, पुल्लिंग) → क्रिया कर्म से → "सीता ने राम को पत्र लिखा।"
प्रश्न: "मोहन ने अपनी बहन को बुलाई।" → कर्म के साथ ‘को’ → पुल्लिंग एकवचन → "मोहन ने अपनी बहन को बुलाया।"
प्रश्न: "मोहन ने अपनी बहन को बुलाई।" → कर्म के साथ ‘को’ → पुल्लिंग एकवचन → "मोहन ने अपनी बहन को बुलाया।"
"शुद्ध वाक्य चुनो: ‘मैंने घर जाना है / मुझे घर जाना है’" · "‘प्रत्येक छात्र अपना काम करें’ में अशुद्धि?" (करे) · "‘सप्रमाण सहित’ में कौन-सी अशुद्धि?" (पुनरुक्ति) · "‘गुरुजी आया है’ का शुद्ध रूप?" (गुरुजी आए हैं) · "‘उसने सीता को बुलाई’ का शुद्ध रूप?" (बुलाया)
वर्तनी शुद्धि Spelling Correction
| अशुद्ध ✗ | शुद्ध ✓ | अशुद्ध ✗ | शुद्ध ✓ | अशुद्ध ✗ | शुद्ध ✓ |
|---|---|---|---|---|---|
| आर्शीवाद, आशिर्वाद | आशीर्वाद | उज्जवल | उज्ज्वल | कवियित्री | कवयित्री |
| अत्याधिक | अत्यधिक | इतिहासिक | ऐतिहासिक | सन्यासी | संन्यासी |
| प्रदर्शिनी | प्रदर्शनी | उपरोक्त | उपर्युक्त | अनाधिकार | अनधिकार |
| दुरावस्था | दुरवस्था | निरोग | नीरोग | पूज्यनीय | पूजनीय / पूज्य |
| श्रृंगार | शृंगार | मंत्रीमंडल | मंत्रिमंडल | कृप्या | कृपया |
| ज्योत्सना | ज्योत्स्ना | सौंदर्यता | सौंदर्य / सुंदरता | स्त्रोत | स्रोत |
| सहस्त्र | सहस्र | आधीन | अधीन | प्रमाणिक | प्रामाणिक |
| अध्यात्मिक | आध्यात्मिक | व्यवहारिक | व्यावहारिक | परिक्षा | परीक्षा |
| रचियता | रचयिता | उन्नती | उन्नति | अतिथी | अतिथि |
| चिन्ह | चिह्न | ब्राम्हण | ब्राह्मण | महत्व | महत्त्व |
| पुनरावृति | पुनरावृत्ति | पश्चाताप | पश्चात्ताप | सूचि | सूची |
| प्रतिक्षा | प्रतीक्षा | अभ्यारण्य | अभयारण्य | निरपराधी | निरपराध |
| गृहणी | गृहिणी | श्रीमति | श्रीमती | कालीदास | कालिदास |
| सन्मान | सम्मान | संसारिक | सांसारिक | पैत्रिक | पैतृक |
| रविन्द्र | रवींद्र | रितु | ऋतु | स्वास्थ | स्वास्थ्य |
| उद्योगिक | औद्योगिक | इकठ्ठा | इकट्ठा | दृष्टा | द्रष्टा |
| सृष्टा | स्रष्टा | सौजन्यता | सौजन्य | परलौकिक | पारलौकिक |
वर्तनी के नियम
-इक प्रत्यय पर पहला स्वर बढ़ता है: इतिहास → ऐतिहासिक, प्रमाण → प्रामाणिक, व्यवहार → व्यावहारिक, उद्योग → औद्योगिक, संसार → सांसारिक, पितृ → पैतृक। ई-अंत शब्द समास में इ: मंत्री → मंत्रिमंडल, स्वामी → स्वामिभक्त।
स्र (स् + र) और स्त्र (स् + त् + र) अलग: स्रोत, सहस्र, स्रष्टा में स्र; अस्त्र, शस्त्र, वस्त्र, शास्त्र में स्त्र। ह्न, ह्म में ‘ह’ पहले: चिह्न, ब्राह्मण। महत् + त्व = महत्त्व (दो ‘त’)।
संधि से वर्तनी: पश्चात् + ताप = पश्चात्ताप · निर् + रोग = नीरोग (र् लोप, इ दीर्घ) · दुर् + अवस्था = दुरवस्था · अन् + अधिकार = अनधिकार · अभय + अरण्य = अभयारण्य
मानक: अंतरराष्ट्रीय; अंतर्राष्ट्रीय भी प्रचलित। ‘ऋ’ की मात्रा (ृ) और ‘रि’ अलग: ऋतु, कृपया, पैतृक।
"शुद्ध वर्तनी चुनो: आशीर्वाद / आर्शीवाद / आशिर्वाद" · "‘उपरोक्त’ का शुद्ध रूप?" (उपर्युक्त) · "शुद्ध शब्द: चिन्ह / चिह्न" (चिह्न) · "‘महत्व’ का शुद्ध रूप?" (महत्त्व) · "अशुद्ध शब्द चुनो: स्रोत / सहस्र / स्त्रोत / शस्त्र" (स्त्रोत)
विराम चिह्न — पहचान और प्रयोग Punctuation Marks
विराम = रुकना। रुकने का क्रम: अल्प (,) < अर्ध (;) < पूर्ण (।) — सबसे अधिक रुकना पूर्ण विराम पर।
| चिह्न | नाम | कहाँ लगता है | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| । | पूर्ण विराम (खड़ी पाई) | वाक्य पूरा होने पर (प्रश्न और विस्मय छोड़कर); अंग्रेज़ी का बिंदु (.) नहीं | राम घर गया। |
| , | अल्प विराम | थोड़ा रुकने पर; सूची में; हाँ / नहीं के बाद; संबोधन के बाद | राम, श्याम और मोहन आए। · हाँ, मैं आऊँगा। · मोहन, इधर आओ। |
| ; | अर्ध विराम | अल्प से अधिक, पूर्ण से कम रुकना; जुड़े हुए उपवाक्यों के बीच | सूर्य उगा; अँधेरा भाग गया। |
| : | उपविराम (अपूर्ण विराम) | किसी शब्द / बात को आगे समझाने से पहले | उदाहरण: राम, सीता |
| :- | विवरण चिह्न | नीचे दिया पूरा विवरण / सूची शुरू करने से पहले | निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखो :- |
| ? | प्रश्नवाचक | प्रश्न वाले वाक्य के अंत में | तुम कहाँ रहते हो? |
| ! | विस्मयादिबोधक | हर्ष, शोक, आश्चर्य, संबोधन के भाव पर | वाह! क्या बात है! · हे ईश्वर! |
| - | योजक चिह्न (छोटी रेखा) | दो शब्दों को जोड़ने में (द्वंद्व, युग्म, पुनरुक्त) | माता-पिता · धीरे-धीरे · सुख-दुख |
| — | निर्देशक चिह्न (लंबी रेखा, डैश) | कथन, उदाहरण या सूची से पहले | गुरु ने कहा — सदा सच बोलो। |
| ‘ ’ “ ” | उद्धरण चिह्न | इकहरा ‘ ’ — पुस्तक, उपनाम, विशेष शब्द · दुहरा “ ” — किसी का कथन ज्यों-का-त्यों | ‘रामचरितमानस’ तुलसीदास की रचना है। · गांधीजी ने कहा, “सत्य ही ईश्वर है।” |
| ( ) [ ] { } | कोष्ठक | ( ) — अर्थ / व्याख्या · [ ] और { } — गणित, नाटक के निर्देश, कोष्ठक के भीतर कोष्ठक | पवन (हवा) चल रही है। |
| … | लोप चिह्न | कुछ अंश छोड़ देने पर | "मैं तो … नहीं कहूँगा।" |
| / | विकल्प चिह्न | दो में से कोई एक (‘या’) | शुद्ध / अशुद्ध · छात्र / छात्रा |
| ॰ | लाघव चिह्न | शब्द को छोटा (संक्षेप) लिखने में | डॉ॰ · पं॰ · उ॰ प्र॰ |
| ^ | हंसपद (त्रुटिपूरक) | लिखते समय छूटा शब्द ऊपर जोड़ने में | राम ^ गया (ऊपर ‘घर’) |
| = | तुल्यता सूचक | बराबरी / अर्थ बताने में | 1 किलो = 1000 ग्राम · नभ = आकाश |
जोड़ी जो उलझाती है: योजक (-) छोटा, शब्द जोड़ता है (माता-पिता) · निर्देशक (—) लंबा, कथन से पहले · उपविराम (:) एक बात समझाने से पहले · विवरण चिह्न (:-) पूरी सूची से पहले।
चिह्न बदला, अर्थ बदला ⚠️"रोको, मत जाने दो।" → उसे रोको · "रोको मत, जाने दो।" → मत रोको
"‘डॉ॰’ में कौन-सा चिह्न?" (लाघव) · "‘^’ का नाम?" (हंसपद / त्रुटिपूरक) · "किसी के कथन को ज्यों-का-त्यों लिखने में?" (दुहरा उद्धरण) · "सबसे अधिक रुकने का चिह्न?" (पूर्ण विराम) · "‘…’ का नाम?" (लोप चिह्न) · "‘धीरे-धीरे’ में कौन-सा चिह्न?" (योजक)