Chapter 8 · Hindi Grammar
अव्यय — क्रियाविशेषण
Indeclinables: Adverb (Kriyavisheshan)🧱 अव्यय (अविकारी = न बदलने वाले)जो शब्द लिंग, वचन, कारक, काल से नहीं बदलते: "लड़का धीरे चलता है", "लड़कियाँ धीरे चलती हैं" — ‘धीरे’ वैसा ही रहा। (अ + व्यय = जिसका व्यय / बदलाव न हो)
🖐️ 5 भेद1. क्रियाविशेषण · 2. संबंधबोधक · 3. समुच्चयबोधक · 4. विस्मयादिबोधक · 5. निपात
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया = विकारी (बदलने वाले) शब्द
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया = विकारी (बदलने वाले) शब्द
1. क्रियाविशेषण — क्रिया की विशेषता (अर्थ के आधार पर 4 भेद)
| भेद | प्रश्न | उपभेद और शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कालवाचक | कब? | समयवाचक: आज, कल, अभी, तुरंत, अब, जब · अवधिवाचक: दिनभर, सदा, लगातार, नित्य · पौनःपुन्यवाचक (= बार-बार होना): बार-बार, प्रतिदिन, हर बार | वह कल आएगा |
| स्थानवाचक | कहाँ? किधर? | स्थितिवाचक: यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, भीतर, बाहर, पास, दूर · दिशावाचक: इधर, उधर, आगे, पीछे, दाएँ, बाएँ | बच्चे बाहर खेल रहे हैं |
| परिमाणवाचक | कितना? | अधिकता: बहुत, अति, खूब · न्यूनता: कम, थोड़ा, ज़रा · पर्याप्ति: बस, काफ़ी, पर्याप्त · तुलना: अधिक, इतना, उतना · श्रेणी: थोड़ा-थोड़ा, क्रमशः | वह बहुत बोलता है |
| रीतिवाचक | कैसे? | प्रकार: धीरे-धीरे, ऐसे, जल्दी, अचानक · निश्चय: अवश्य, सचमुच, निःसंदेह · अनिश्चय: शायद, कदाचित्, संभवतः · स्वीकार: हाँ, जी, ठीक · निषेध: न, नहीं, मत · कारण: क्यों, इसलिए · निष्कर्ष: अतः, अतएव · अवधारण: तो, ही, भी | कछुआ धीरे-धीरे चलता है |
क्रियाविशेषण — रूप और प्रयोग के आधार पर
| आधार | भेद | उदाहरण |
|---|---|---|
| रूप | मूल (किसी से बना नहीं) | ठीक, दूर, अचानक, फिर, नहीं |
| यौगिक (दूसरे शब्द / प्रत्यय जोड़कर) | दिनभर, ध्यानपूर्वक, मन से, रातोंरात, यहाँ तक | |
| स्थानीय (दूसरा शब्द-भेद बिना बदले क्रियाविशेषण बने) | तुम दौड़कर चलते हो · वह पैदल आया | |
| प्रयोग | साधारण (वाक्य में स्वतंत्र) | अब मैं क्या करूँ? |
| संयोजक (दो उपवाक्य जोड़े: जब, जहाँ, जिधर, ज्यों) | जब वह आया, तब मैं सो रहा था | |
| अनुबद्ध (किसी शब्द के साथ जुड़कर ज़ोर दे) | मैंने उसे देखा तक नहीं · यह तो होना ही था |
‘बहुत’ — परीक्षा-कुंजी का नियम: संज्ञा से पहले ("बहुत दूध") → परिमाणवाचक विशेषण · विशेषण से पहले ("बहुत सुंदर") → प्रविशेषण · क्रिया या क्रियाविशेषण से पहले ("वह बहुत खाता है", "वह बहुत तेज़ दौड़ता है") → परिमाणवाचक क्रियाविशेषण।
क्रियाविशेषण या संबंधबोधक? "वह बाहर गया" → अकेला, क्रिया की विशेषता → क्रियाविशेषण · "वह घर के बाहर गया" → संज्ञा + ‘के’ के बाद → संबंधबोधक। ऊपर, नीचे, आगे, पीछे, पास, दूर पर यही नियम।
"‘वह धीरे-धीरे चलता है’ में क्रियाविशेषण का भेद?" (रीतिवाचक) · "‘वह प्रतिदिन आता है’?" (कालवाचक — पौनःपुन्य) · "‘शायद वह आए’ में ‘शायद’?" (रीतिवाचक — अनिश्चय) · "‘वह बहुत खाता है’ में ‘बहुत’?" (परिमाणवाचक क्रियाविशेषण) · "‘ध्यानपूर्वक’ रूप के आधार पर?" (यौगिक) · "अविकारी शब्द कौन-सा: सुंदर / वह / धीरे / लड़का?" (धीरे)
संबंधबोधक और समुच्चयबोधक Postpositions & Conjunctions
2. संबंधबोधक — संज्ञा/सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्द से
प्रायः का, के, की, से के बाद आते हैं: "पेड़ के नीचे", "माँ के साथ", "घर की ओर", "विद्यालय से पहले"।
| अर्थ के आधार पर भेद | संबंधबोधक | अर्थ के आधार पर भेद | संबंधबोधक |
|---|---|---|---|
| कालवाचक | पहले, बाद, पूर्व, पश्चात् | हेतुवाचक | कारण, लिए, वास्ते, मारे, हेतु |
| स्थानवाचक | ऊपर, नीचे, भीतर, बाहर, पास, निकट, सामने | विरोधवाचक | विरुद्ध, ख़िलाफ़, उलटे, विपरीत |
| दिशावाचक | ओर, तरफ़, प्रति, आर-पार | सादृश्यवाचक (= समानता; पहले नाम ‘समतावाचक’) | समान, तरह, भाँति, जैसा, बराबर, अनुसार |
| साधनवाचक | द्वारा, ज़रिए, सहारे, मारफ़त | सहचरवाचक (= साथ; ‘संगवाचक’) | साथ, संग, सहित, समेत |
| व्यतिरेकवाचक (= छोड़कर / बिना) | बिना, सिवा, अलावा, अतिरिक्त | विनिमयवाचक (= बदले में) | बदले, जगह, एवज़ में |
| तुलनावाचक | अपेक्षा, बनिस्बत, आगे, सामने | संग्रहवाचक (= सीमा / पूरा) | तक, पर्यंत, भर, मात्र (‘समेत’ कुछ पुस्तकों में यहाँ भी) |
| विषयवाचक (= किस विषय में): बाबत, विषय में, बारे में, निस्बत | प्रयोग से: संबद्ध — विभक्ति के बाद (धन के बिना, पूजा से पहले) · अनुबद्ध — संज्ञा के विकारी रूप के सीधे बाद (किनारे तक, सखियों सहित, कटोरे भर) | ||
3. समुच्चयबोधक (योजक) — दो शब्दों / वाक्यों को जोड़े
समानाधिकरण (= बराबर दर्जे के वाक्य जोड़े → संयुक्त वाक्य)
संयोजक (= जोड़ने वाले): और, तथा, एवं, व — "राम और श्याम आए"
विभाजक / विकल्प (= दो में से एक चुनने वाले): या, अथवा, किंवा, चाहे…चाहे, न…न — "चाय या कॉफ़ी"
विरोधदर्शक: पर, परंतु, किंतु, लेकिन, मगर, बल्कि — "वह गरीब है किंतु ईमानदार है"
परिणामदर्शक: इसलिए, अतः, अतएव, सो — "वर्षा हुई, इसलिए मैं नहीं गया"
विभाजक / विकल्प (= दो में से एक चुनने वाले): या, अथवा, किंवा, चाहे…चाहे, न…न — "चाय या कॉफ़ी"
विरोधदर्शक: पर, परंतु, किंतु, लेकिन, मगर, बल्कि — "वह गरीब है किंतु ईमानदार है"
परिणामदर्शक: इसलिए, अतः, अतएव, सो — "वर्षा हुई, इसलिए मैं नहीं गया"
व्यधिकरण (= मुख्य वाक्य से आश्रित वाक्य जोड़े → मिश्र वाक्य)
कारणवाचक: क्योंकि, चूँकि — "वह नहीं आया क्योंकि बीमार था"
संकेतवाचक: यदि…तो, यद्यपि…तथापि, जब…तब, जो…तो — "यदि पढ़ोगे तो पास होगे"
उद्देश्यवाचक: ताकि, कि, जिससे कि — "मेहनत करो ताकि सफल हो"
स्वरूपवाचक: कि, अर्थात्, यानी, मानो — "उसने कहा कि मैं आऊँगा"
संकेतवाचक: यदि…तो, यद्यपि…तथापि, जब…तब, जो…तो — "यदि पढ़ोगे तो पास होगे"
उद्देश्यवाचक: ताकि, कि, जिससे कि — "मेहनत करो ताकि सफल हो"
स्वरूपवाचक: कि, अर्थात्, यानी, मानो — "उसने कहा कि मैं आऊँगा"
प्रश्न: "वह बीमार था, इसलिए नहीं आया" में ‘इसलिए’? → परिणाम बताता है → समानाधिकरण (परिणामदर्शक)।
प्रश्न: "वह नहीं आया क्योंकि बीमार था" में ‘क्योंकि’? → कारण बताने वाला आश्रित वाक्य जोड़ता है → व्यधिकरण (कारणवाचक)।
प्रश्न: "वह नहीं आया क्योंकि बीमार था" में ‘क्योंकि’? → कारण बताने वाला आश्रित वाक्य जोड़ता है → व्यधिकरण (कारणवाचक)।
"‘मोहन घर के बाहर बैठा है’ में ‘के बाहर’?" (संबंधबोधक) · "‘के बिना’ किस प्रकार का संबंधबोधक?" (व्यतिरेकवाचक) · "‘की तरह’?" (सादृश्यवाचक) · "‘के साथ’?" (सहचरवाचक) · "‘यद्यपि…तथापि’ कौन-सा योजक?" (व्यधिकरण — संकेतवाचक) · "‘किंतु’?" (समानाधिकरण — विरोधदर्शक)
विस्मयादिबोधक और निपात Interjection & Particle
4. विस्मयादिबोधक — मन के भाव (वाक्य से अलग, चिह्न ‘!’)
| भाव | शब्द | भाव | शब्द |
|---|---|---|---|
| हर्षबोधक | वाह!, अहा!, शाबाश!, धन्य! | तिरस्कारबोधक (घृणा) | छि:!, धिक्!, थू!, हट! |
| शोकबोधक | हाय!, आह!, उफ़!, हे राम! | स्वीकृतिबोधक | हाँ!, जी हाँ!, अच्छा! |
| आश्चर्यबोधक | अरे!, ओह!, क्या!, ऐं! | अनुमोदनबोधक (= समर्थन) | ठीक!, अच्छा!, हाँ-हाँ!, बहुत अच्छा! |
| भयबोधक | बाप रे!, हाय राम! | संबोधनबोधक | अरे!, हे!, ओ!, अजी! |
| चेतावनीबोधक: सावधान!, खबरदार!, बचो! | एक शब्द कई भावों में आ सकता है (अरे!, हाय!) — वाक्य का भाव देखो। | ||
5. निपात — बल देने वाले शब्द
निपात के 9 प्रकारबलदायक / सीमाबोधक: ही, भी, तो, तक, भर, मात्र, केवल, सिर्फ़
स्वीकारात्मक: हाँ, जी, जी हाँ · नकारात्मक: नहीं, न, जी नहीं · निषेधात्मक: मत
प्रश्नबोधक: क्या, न (तुम चलोगे न?) · विस्मयबोधक: क्या, काश
तुलनाबोधक: सा (चाँद सा मुख) · आदरबोधक: जी (गुरुजी)
अवधारणबोधक (= ठीक-ठीक / अनुमान बताना): ठीक, लगभग, करीब, तकरीबन — "लगभग सौ लोग आए"
स्वीकारात्मक: हाँ, जी, जी हाँ · नकारात्मक: नहीं, न, जी नहीं · निषेधात्मक: मत
प्रश्नबोधक: क्या, न (तुम चलोगे न?) · विस्मयबोधक: क्या, काश
तुलनाबोधक: सा (चाँद सा मुख) · आदरबोधक: जी (गुरुजी)
अवधारणबोधक (= ठीक-ठीक / अनुमान बताना): ठीक, लगभग, करीब, तकरीबन — "लगभग सौ लोग आए"
स्थान बदला, अर्थ बदलाराम ही आज दिल्ली जाएगा (कोई और नहीं)
राम आज ही दिल्ली जाएगा (कल नहीं)
राम आज दिल्ली ही जाएगा (कहीं और नहीं)
उसने मुझे बोलने तक नहीं दिया · मैं भी चलूँगा · तुम तो आओ
‘तक’: "घर तक" में संबंधबोधक, "बोलने तक नहीं दिया" में निपात।
राम आज ही दिल्ली जाएगा (कल नहीं)
राम आज दिल्ली ही जाएगा (कहीं और नहीं)
उसने मुझे बोलने तक नहीं दिया · मैं भी चलूँगा · तुम तो आओ
‘तक’: "घर तक" में संबंधबोधक, "बोलने तक नहीं दिया" में निपात।
एक शब्द, कई वर्ग — कौन जीतेगा? हाँ, नहीं, केवल, लगभग, ठीक, तक, भी, भर, मात्र जैसे शब्द क्रियाविशेषण, संबंधबोधक या निपात — कई वर्गों में मिलते हैं। नियम: (1) विकल्पों में ‘निपात’ हो और शब्द केवल ज़ोर / सीमा / हाँ-ना बता रहा हो → निपात चुनो। (2) संज्ञा के बाद आए (घर तक, कटोरे भर) → संबंधबोधक। (3) ‘!’ के साथ अलग खड़ा हो (ठीक!, अच्छा!) → विस्मयादिबोधक। (4) इसलिए, अतः, अतएव — दो वाक्यों को जोड़ें → समुच्चयबोधक (परिणामदर्शक); अकेले क्रिया की विशेषता बनें → रीतिवाचक।
दोहराव अशुद्ध: "केवल दो रुपये मात्र" ✗ → "केवल दो रुपये" ✓ · "सारे देश भर में" ✗ → "सारे देश में" / "देश भर में" ✓
"क्रि-सं-स-वि-नि" = अव्यय के 5 भेद। ‘ही, भी, तो, तक’ बल दें → निपात।
प्रश्न: "लगभग पचास छात्र आए" में ‘लगभग’? (विकल्प: क्रियाविशेषण / निपात / विशेषण / संबंधबोधक) → अनुमान बताने वाला → निपात (अवधारणबोधक) (यदि विकल्प में निपात हो; अन्यथा परिमाणवाचक क्रियाविशेषण)।
"‘राम ही जाएगा’ में ‘ही’?" (निपात) · "‘अरे! तुम आ गए’ में ‘अरे’?" (विस्मयादिबोधक — आश्चर्य) · "‘ठीक! ऐसा ही करो’ में ‘ठीक’?" (अनुमोदनबोधक) · "‘उसने बोलने तक नहीं दिया’ में ‘तक’?" (निपात)