Skip to content
TestTaiyari
HomeExamsNotesToday's GKQuiz ReelsNewMy TestsPricing
⌕Search exams or tests…
Englishहिन्दी
Log in
All notes/हिंदी

Chapter 9 · Hindi Grammar

वाक्य — पद, पदबंध, उपवाक्य, अंग, गुण

Sentence: Building Blocks
📝 वाक्यशब्दों का वह सार्थक समूह जिससे वक्ता का भाव पूरी तरह समझ आ जाए: "राम विद्यालय जाता है।"
🧩 वाक्य के 2 अंगउद्देश्य (= जिसके बारे में कहा जाए: कर्ता + उसका विस्तार) · विधेय (= उद्देश्य के बारे में जो कहा जाए: क्रिया + कर्म / पूरक + विस्तार)

छोटे से बड़े तक: पद → पदबंध → उपवाक्य → वाक्य

इकाईपहचानउदाहरण
पदवाक्य में प्रयोग हुआ शब्द (विभक्ति / प्रत्यय लगकर व्याकरण से बँधा)"राम ने फल खाया" — राम ने, फल, खाया = तीन पद
पदबंधकई पद मिलकर एक पद का काम करें; इसमें अपनी पूरी क्रिया नहीं होती। भेद: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण पदबंध"सबसे तेज़ दौड़ने वाला लड़का जीता" (संज्ञा पदबंध) · "वह पढ़ता रहा होगा" (क्रिया पदबंध) · "बहुत धीरे-धीरे चलो" (क्रियाविशेषण पदबंध)
वाक्यांशशब्दों का समूह जिसका अर्थ तो है पर पूरा भाव नहीं (मुहावरे वाक्यांश होते हैं)"आँख का तारा" · "सुबह-सुबह"
उपवाक्यजिसमें अपना उद्देश्य और अपनी क्रिया हो, पर वह बड़े वाक्य का हिस्सा हो"जब वर्षा हुई, तब मोर नाचे" — दोनों भाग उपवाक्य
वाक्यपूरा भाव देने वाला, स्वतंत्र"वर्षा होने पर मोर नाचे।"
पदबंध या उपवाक्य? समूह में क्रिया है (हुई, आया, है) → उपवाक्य · क्रिया नहीं, केवल कई शब्द मिलकर एक संज्ञा / विशेषण / क्रियाविशेषण का काम → पदबंध।
वाक्यउद्देश्यविधेय
मेरा छोटा भाई रोज़ विद्यालय जाता है।मेरा छोटा भाई (कर्ता: भाई · कर्ता-विस्तार: मेरा छोटा)रोज़ विद्यालय जाता है (क्रिया: जाता है · क्रिया-विस्तार: रोज़ · स्थान: विद्यालय)
परिश्रमी छात्र परीक्षा में सफल हुए।परिश्रमी छात्रपरीक्षा में सफल हुए (‘सफल’ = पूरक)

वाक्य के 6 गुण (अच्छे वाक्य की शर्तें)

गुणअर्थगलत उदाहरण
सार्थकताहर शब्द का अर्थ हो"राम ढपढप खाता है" (‘ढपढप’ अर्थहीन)
योग्यताशब्दों का अर्थ आपस में मेल खाए, बात संभव हो"वह आग से प्यास बुझाता है"
आकांक्षाअर्थ पूरा हो, कुछ और जानने की इच्छा बाकी न रहे"राम ने…" (अधूरा)
आसत्ति (निकटता)शब्द पास-पास बोले / लिखे जाएँ, बीच में लंबा अंतर न हो"राम … (एक घंटे बाद) … खाता है"
पदक्रमशब्द सही क्रम में हों (कर्ता → कर्म → क्रिया)"खाता फल राम है"
अन्वयलिंग, वचन, पुरुष, काल का आपस में मेल"लड़कियाँ खेलता है"
"‘सबसे तेज़ दौड़ने वाला लड़का’ क्या है?" (संज्ञा पदबंध) · "पदबंध और उपवाक्य में अंतर?" (उपवाक्य में क्रिया होती है) · "वाक्य के दो अंग?" (उद्देश्य, विधेय) · "‘वह आग से प्यास बुझाता है’ में कौन-सा गुण नहीं?" (योग्यता) · "‘लड़कियाँ खेलता है’ में किस गुण का अभाव?" (अन्वय)

वाक्य — रचना के आधार पर भेद Simple, Compound & Complex Sentences

🔗 योजकदो शब्दों / उपवाक्यों को जोड़ने वाला शब्द (और, किंतु, क्योंकि, कि…)।
🧱 उपवाक्य के दो प्रकारप्रधान (= अपने-आप पूरा, मुख्य) · आश्रित (= अकेले अधूरा, प्रधान पर टिका)
भेदपहचानउदाहरण
सरल (साधारण)एक उद्देश्य, एक विधेय, एक मुख्य क्रियावह मेहनत करके सफल हुआ। · बच्चे खेल रहे हैं।
संयुक्तदो या अधिक प्रधान (स्वतंत्र) उपवाक्य, समानाधिकरण योजक (= बराबर दर्जे को जोड़ने वाले) से जुड़ेउसने मेहनत की और सफल हुआ। · वह गरीब है किंतु ईमानदार है।
मिश्रएक प्रधान + एक या अधिक आश्रित उपवाक्य, व्यधिकरण योजक (= आश्रित बनाने वाले) से जुड़ेजब उसने मेहनत की तब वह सफल हुआ। · मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है।
समानाधिकरण योजक → संयुक्तऔर, तथा, एवं, व · या, अथवा, किंवा · पर, परंतु, किंतु, लेकिन, बल्कि · इसलिए, अतः, अतएव
व्यधिकरण योजक → मिश्रकि, जो, जिसे, जिसकी · क्योंकि, चूँकि · यदि…तो, जब…तब, ज्यों ही…त्यों ही · यद्यपि…तथापि, चाहे…फिर भी · जैसे…वैसे, जितना…उतना · ताकि, जिससे कि
पहचान की कसौटी: योजक हटा दो — दोनों हिस्से अपने-आप पूरे वाक्य बनें → संयुक्त · एक हिस्सा अधूरा लगे ("जब उसने मेहनत की…") → मिश्र · क्रिया ही एक है → सरल।

मिश्र वाक्य के आश्रित उपवाक्य

संज्ञा उपवाक्यप्रधान वाक्य की क्रिया का कर्म / कर्ता बने; प्रायः ‘कि’ से: "मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है।"
विशेषण उपवाक्यकिसी संज्ञा की विशेषता; जो, जिसे, जिसकी से: "वह लड़का जो कल आया था, मेरा भाई है।"
क्रियाविशेषण उपवाक्यसमय, स्थान, कारण, शर्त; जब, जहाँ, क्योंकि, यदि से: "जब वर्षा हुई तब मोर नाचे।"
प्रश्न: "वह खाना खाकर सो गया" → मुख्य क्रिया एक (सो गया), ‘खाकर’ पूर्वकालिक → सरल · "यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी" → ‘यदि’ वाला भाग अधूरा → मिश्र
"‘मैं जानता हूँ कि वह सच्चा है’ — वाक्य का भेद?" (मिश्र) · "‘वह आया और बैठ गया’?" (संयुक्त) · "रेखांकित उपवाक्य का भेद: ‘जो परिश्रम करता है, वह सफल होता है’" (विशेषण उपवाक्य) · "‘वह पढ़कर खेलने गया’ का संयुक्त वाक्य?" (उसने पढ़ा और खेलने गया) · "‘क्योंकि’ कौन-सा योजक?" (व्यधिकरण)

वाक्य — अर्थ के आधार पर 8 भेद Sentence Types by Meaning

भेद (दोनों नाम)क्या बताता हैउदाहरण
1. विधानार्थक / विधानवाचककिसी बात का सामान्य होना / कथनसूर्य पूर्व में उगता है। · वह पढ़ रहा है।
2. निषेधार्थक / निषेधवाचककाम का न होना (नहीं, न, मत)मैं आज बाज़ार नहीं जाऊँगा।
3. प्रश्नार्थक / प्रश्नवाचकप्रश्न पूछा जाए (?)तुम कहाँ जा रहे हो?
4. आज्ञार्थक / आज्ञावाचक (विधिवाचक)आज्ञा, अनुरोध, उपदेशदरवाज़ा बंद करो। · कृपया बैठिए।
5. इच्छार्थक / इच्छावाचकइच्छा, कामना, आशीर्वादभगवान तुम्हें लंबी आयु दे। · तुम्हारी यात्रा सफल हो।
6. संदेहार्थक / संदेहवाचकसंदेह, संभावना (शायद, संभवतः)शायद आज वर्षा हो। · वह सो गया होगा।
7. संकेतार्थक / संकेतवाचकएक काम दूसरे पर निर्भर — शर्त (यदि…तो)यदि तुम पढ़ते तो पास हो जाते।
8. विस्मयादिबोधकआश्चर्य, हर्ष, शोक (!)वाह! कितना सुंदर दृश्य है!
संकेतार्थक या संदेहार्थक? ‘यदि…तो’ (एक बात दूसरी पर टिकी) → संकेतार्थक · ‘शायद, संभवतः, होगा’ (पक्का पता नहीं) → संदेहार्थक। ‘ईश्वर करे / भगवान … दे’ → इच्छार्थक।

अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन

मूल वाक्यबदलोनया वाक्य
वह ईमानदार है।निषेधार्थकवह बेईमान नहीं है।
सब यह बात जानते हैं।प्रश्नार्थकयह बात कौन नहीं जानता?
यह बहुत सुंदर दृश्य है।विस्मयादिबोधकवाह! कितना सुंदर दृश्य है!
तुम पढ़ते हो।आज्ञार्थकतुम पढ़ो।
तुम सफल हो।इच्छार्थकईश्वर करे, तुम सफल हो।
वह आएगा।संदेहार्थकशायद वह आए।
मेहनत करो, सफल होगे।संकेतार्थकयदि मेहनत करोगे तो सफल होगे।
प्रश्न: "यदि वर्षा होगी तो फसल अच्छी होगी" — रचना और अर्थ? → रचना: मिश्र (आश्रित उपवाक्य ‘यदि…’) · अर्थ: संकेतार्थक
प्रश्न: "मैं आज नहीं खेलूँगा" → अर्थ: निषेधार्थक · रचना: सरल
एक वाक्य के दो नाम हो सकते हैं: रचना से (सरल / संयुक्त / मिश्र) और अर्थ से (विधान, निषेध…) — प्रश्न का आधार ध्यान से पढ़ो। पुस्तकों में ‘-अर्थक’ और ‘-वाचक’ दोनों नाम मिलते हैं; अर्थ एक ही है।
"‘भगवान तुम्हारा भला करे’ — अर्थ के आधार पर?" (इच्छार्थक) · "‘शायद वह आज आए’?" (संदेहार्थक) · "‘यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे’?" (संकेतार्थक) · "‘कृपया शांत रहें’?" (आज्ञार्थक) · "अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद?" (8) · "‘वह सच बोलता है’ का निषेधार्थक?" (वह झूठ नहीं बोलता)

वाक्य रूपांतरण — सरल, संयुक्त, मिश्र Transforming Sentences

वाक्य का अर्थ वही रहे, केवल रचना बदले — इसे वाक्य रूपांतरण कहते हैं। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है: "इस वाक्य का संयुक्त / मिश्र रूप चुनो"।

सरलसंयुक्तमिश्र
वह मेहनत करके सफल हुआ।उसने मेहनत की और सफल हुआ।जब उसने मेहनत की तब वह सफल हुआ।
बीमार होने के कारण वह नहीं आया।वह बीमार था, इसलिए नहीं आया।वह नहीं आया क्योंकि वह बीमार था।
ईमानदार व्यक्ति का सब सम्मान करते हैं।वह व्यक्ति ईमानदार है, इसलिए सब उसका सम्मान करते हैं।जो व्यक्ति ईमानदार है, उसका सब सम्मान करते हैं।
सूर्य निकलने पर अँधेरा दूर हो गया।सूर्य निकला और अँधेरा दूर हो गया।ज्यों ही सूर्य निकला, त्यों ही अँधेरा दूर हो गया।
गरीब होते हुए भी वह ईमानदार है।वह गरीब है, किंतु ईमानदार है।यद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है।
परिश्रमी छात्र अवश्य सफल होते हैं।छात्र परिश्रम करते हैं और सफल होते हैं।जो छात्र परिश्रम करते हैं, वे अवश्य सफल होते हैं।
सरल → संयुक्त: दूसरी क्रिया को अलग उपवाक्य बनाओ + और / इसलिए / किंतु · सरल → मिश्र: एक भाग को आश्रित उपवाक्य बनाओ + जब…तब, क्योंकि, जो…वह, कि, यद्यपि…तथापि · संयुक्त / मिश्र → सरल: एक क्रिया को -कर / -के कारण / -ने पर / -ते हुए भी रूप में बदलो
प्रश्न: "वह खाना खाकर सो गया" → मुख्य क्रिया एक (सो गया), ‘खाकर’ पूर्वकालिक → सरल
प्रश्न: इसका संयुक्त रूप? → "उसने खाना खाया और सो गया।"
प्रश्न: "जैसे ही घंटी बजी, बच्चे बाहर दौड़ पड़े" का सरल रूप? → "घंटी बजते ही बच्चे बाहर दौड़ पड़े।"
सरल की पहचान: ‘-कर, -के, -ते ही, -ने पर, -ते हुए’ जैसे रूप, पर मुख्य क्रिया एक · संयुक्त: बीच में ‘और / पर / इसलिए / या’ · मिश्र: जोड़ी वाले शब्द ‘जो-वह, जब-तब, यदि-तो, यद्यपि-तथापि’ या ‘कि / क्योंकि’।
"‘वह पढ़कर खेलने गया’ का संयुक्त वाक्य?" (उसने पढ़ा और खेलने गया) · "‘गरीब होते हुए भी वह ईमानदार है’ का मिश्र रूप?" (यद्यपि…तथापि) · "निम्न में मिश्र वाक्य चुनो" · "‘जो परिश्रम करेगा, वह सफल होगा’ का सरल रूप?" (परिश्रमी सफल होगा)

वाक्य शुद्धि — अशुद्धि के प्रकार Sentence Correction

अशुद्धिअशुद्ध ✗शुद्ध ✓
लिंगदही खट्टी है। · सरकार ने नया नियम बनाई।दही खट्टा है। · सरकार ने नया नियम बनाया।
वचनमैं आपका दर्शन करने आया हूँ। · उसने दो केला खाया।मैं आपके दर्शन करने आया हूँ। · उसने दो केले खाए।
आदर (सम्मानार्थ बहुवचन)गुरुजी आया है। · पिताजी कल गया।गुरुजी आए हैं। · पिताजी कल गए।
पुरुष / आदर-संगतिआप जाओ। · तुम चिंता मत कीजिए।आप जाइए। · तुम चिंता मत करो।
‘प्रत्येक / हर एक’ + एकवचनप्रत्येक विद्यार्थी अपना काम करें।प्रत्येक विद्यार्थी अपना काम करे।
परसर्ग (कारक चिह्न)मैंने घर जाना है। · उसने मुझे प्रश्न पूछा। · वह कुर्सी में बैठा है।मुझे घर जाना है। · उसने मुझसे प्रश्न पूछा। · वह कुर्सी पर बैठा है।
‘ने’ का प्रयोगराम ने आया। · उसने किताब लाई।राम आया। · वह किताब लाया (‘लाना’ के साथ ‘ने’ नहीं)।
काल-संगतिजब मैं स्टेशन पहुँचा, गाड़ी चली गई है।…गाड़ी चली गई थी।
सर्वनाममेरे को पुस्तक चाहिए। · हम हमारे देश से प्रेम करते हैं।मुझे पुस्तक चाहिए। · हम अपने देश से प्रेम करते हैं।
विशेषणवह सबसे श्रेष्ठतम छात्र है।वह सर्वश्रेष्ठ छात्र है।
पदक्रमएक फूलों की माला लाओ।फूलों की एक माला लाओ।
पुनरुक्ति (दोहराव)केवल मात्र दो रुपये · सप्रमाण सहित · अनेकों लोग · दोनों के दोनों · पुनः दोबारा · आज के आधुनिक युग में · सामूहिक रूप से इकट्ठे होकरकेवल दो रुपये · सप्रमाण · अनेक लोग · दोनों · पुनः / दोबारा · आधुनिक युग में · इकट्ठे होकर
‘ने’ होने पर क्रिया का मेल: मुख्य कर्म के साथ ‘को’ न हो → क्रिया कर्म के लिंग-वचन से (उसने रोटी खाई, उसने फल खाए) · मुख्य कर्म के साथ ‘को’ हो या कर्म न हो → क्रिया पुल्लिंग एकवचन (उसने सीता को बुलाया · राम ने कहा) · ‘ने’ नहीं लगता: अकर्मक क्रिया, अपूर्ण भूत, और लाना, भूलना, सकना, चुकना · अकर्मक होकर भी ‘ने’: नहाना, छींकना, खाँसना, थूकना (उसने छींका)
वाक्य शुद्धि का क्रम: (1) क्रिया का लिंग-वचन कर्ता / कर्म से मिलाओ (‘ने’ हो तो ऊपर का नियम) · (2) आदर वाले कर्ता के साथ बहुवचन क्रिया · (3) परसर्ग सही? · (4) सर्वनाम का रूप (मुझे, अपना) · (5) दोहराव हटाओ · (6) पदक्रम (विशेषण अपनी संज्ञा के पास) · (7) काल दोनों उपवाक्यों में मेल खाए।
प्रश्न: "सीता ने राम को पत्र लिखी।" → ‘ने’ + कर्म ‘पत्र’ (बिना को, पुल्लिंग) → क्रिया कर्म से → "सीता ने राम को पत्र लिखा।"
प्रश्न: "मोहन ने अपनी बहन को बुलाई।" → कर्म के साथ ‘को’ → पुल्लिंग एकवचन → "मोहन ने अपनी बहन को बुलाया।"
"शुद्ध वाक्य चुनो: ‘मैंने घर जाना है / मुझे घर जाना है’" · "‘प्रत्येक छात्र अपना काम करें’ में अशुद्धि?" (करे) · "‘सप्रमाण सहित’ में कौन-सी अशुद्धि?" (पुनरुक्ति) · "‘गुरुजी आया है’ का शुद्ध रूप?" (गुरुजी आए हैं) · "‘उसने सीता को बुलाई’ का शुद्ध रूप?" (बुलाया)

वर्तनी शुद्धि Spelling Correction

अशुद्ध ✗शुद्ध ✓अशुद्ध ✗शुद्ध ✓अशुद्ध ✗शुद्ध ✓
आर्शीवाद, आशिर्वादआशीर्वादउज्जवलउज्ज्वलकवियित्रीकवयित्री
अत्याधिकअत्यधिकइतिहासिकऐतिहासिकसन्यासीसंन्यासी
प्रदर्शिनीप्रदर्शनीउपरोक्तउपर्युक्तअनाधिकारअनधिकार
दुरावस्थादुरवस्थानिरोगनीरोगपूज्यनीयपूजनीय / पूज्य
श्रृंगारशृंगारमंत्रीमंडलमंत्रिमंडलकृप्याकृपया
ज्योत्सनाज्योत्स्नासौंदर्यतासौंदर्य / सुंदरतास्त्रोतस्रोत
सहस्त्रसहस्रआधीनअधीनप्रमाणिकप्रामाणिक
अध्यात्मिकआध्यात्मिकव्यवहारिकव्यावहारिकपरिक्षापरीक्षा
रचियतारचयिताउन्नतीउन्नतिअतिथीअतिथि
चिन्हचिह्नब्राम्हणब्राह्मणमहत्वमहत्त्व
पुनरावृतिपुनरावृत्तिपश्चातापपश्चात्तापसूचिसूची
प्रतिक्षाप्रतीक्षाअभ्यारण्यअभयारण्यनिरपराधीनिरपराध
गृहणीगृहिणीश्रीमतिश्रीमतीकालीदासकालिदास
सन्मानसम्मानसंसारिकसांसारिकपैत्रिकपैतृक
रविन्द्ररवींद्ररितुऋतुस्वास्थस्वास्थ्य
उद्योगिकऔद्योगिकइकठ्ठाइकट्ठादृष्टाद्रष्टा
सृष्टास्रष्टासौजन्यतासौजन्यपरलौकिकपारलौकिक

वर्तनी के नियम

-इक प्रत्यय पर पहला स्वर बढ़ता है: इतिहास → ऐतिहासिक, प्रमाण → प्रामाणिक, व्यवहार → व्यावहारिक, उद्योग → औद्योगिक, संसार → सांसारिक, पितृ → पैतृक। ई-अंत शब्द समास में इ: मंत्री → मंत्रिमंडल, स्वामी → स्वामिभक्त।
स्र (स् + र) और स्त्र (स् + त् + र) अलग: स्रोत, सहस्र, स्रष्टा में स्र; अस्त्र, शस्त्र, वस्त्र, शास्त्र में स्त्र। ह्न, ह्म में ‘ह’ पहले: चिह्न, ब्राह्मण। महत् + त्व = महत्त्व (दो ‘त’)।
संधि से वर्तनी: पश्चात् + ताप = पश्चात्ताप · निर् + रोग = नीरोग (र् लोप, इ दीर्घ) · दुर् + अवस्था = दुरवस्था · अन् + अधिकार = अनधिकार · अभय + अरण्य = अभयारण्य
मानक: अंतरराष्ट्रीय; अंतर्राष्ट्रीय भी प्रचलित। ‘ऋ’ की मात्रा (ृ) और ‘रि’ अलग: ऋतु, कृपया, पैतृक।
"शुद्ध वर्तनी चुनो: आशीर्वाद / आर्शीवाद / आशिर्वाद" · "‘उपरोक्त’ का शुद्ध रूप?" (उपर्युक्त) · "शुद्ध शब्द: चिन्ह / चिह्न" (चिह्न) · "‘महत्व’ का शुद्ध रूप?" (महत्त्व) · "अशुद्ध शब्द चुनो: स्रोत / सहस्र / स्त्रोत / शस्त्र" (स्त्रोत)

विराम चिह्न — पहचान और प्रयोग Punctuation Marks

विराम = रुकना। रुकने का क्रम: अल्प (,) < अर्ध (;) < पूर्ण (।) — सबसे अधिक रुकना पूर्ण विराम पर।

चिह्ननामकहाँ लगता हैउदाहरण
।पूर्ण विराम (खड़ी पाई)वाक्य पूरा होने पर (प्रश्न और विस्मय छोड़कर); अंग्रेज़ी का बिंदु (.) नहींराम घर गया।
,अल्प विरामथोड़ा रुकने पर; सूची में; हाँ / नहीं के बाद; संबोधन के बादराम, श्याम और मोहन आए। · हाँ, मैं आऊँगा। · मोहन, इधर आओ।
;अर्ध विरामअल्प से अधिक, पूर्ण से कम रुकना; जुड़े हुए उपवाक्यों के बीचसूर्य उगा; अँधेरा भाग गया।
:उपविराम (अपूर्ण विराम)किसी शब्द / बात को आगे समझाने से पहलेउदाहरण: राम, सीता
:-विवरण चिह्ननीचे दिया पूरा विवरण / सूची शुरू करने से पहलेनिम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखो :-
?प्रश्नवाचकप्रश्न वाले वाक्य के अंत मेंतुम कहाँ रहते हो?
!विस्मयादिबोधकहर्ष, शोक, आश्चर्य, संबोधन के भाव परवाह! क्या बात है! · हे ईश्वर!
-योजक चिह्न (छोटी रेखा)दो शब्दों को जोड़ने में (द्वंद्व, युग्म, पुनरुक्त)माता-पिता · धीरे-धीरे · सुख-दुख
—निर्देशक चिह्न (लंबी रेखा, डैश)कथन, उदाहरण या सूची से पहलेगुरु ने कहा — सदा सच बोलो।
‘ ’ “ ”उद्धरण चिह्नइकहरा ‘ ’ — पुस्तक, उपनाम, विशेष शब्द · दुहरा “ ” — किसी का कथन ज्यों-का-त्यों‘रामचरितमानस’ तुलसीदास की रचना है। · गांधीजी ने कहा, “सत्य ही ईश्वर है।”
( ) [ ] { }कोष्ठक( ) — अर्थ / व्याख्या · [ ] और { } — गणित, नाटक के निर्देश, कोष्ठक के भीतर कोष्ठकपवन (हवा) चल रही है।
…लोप चिह्नकुछ अंश छोड़ देने पर"मैं तो … नहीं कहूँगा।"
/विकल्प चिह्नदो में से कोई एक (‘या’)शुद्ध / अशुद्ध · छात्र / छात्रा
॰लाघव चिह्नशब्द को छोटा (संक्षेप) लिखने मेंडॉ॰ · पं॰ · उ॰ प्र॰
^हंसपद (त्रुटिपूरक)लिखते समय छूटा शब्द ऊपर जोड़ने मेंराम ^ गया (ऊपर ‘घर’)
=तुल्यता सूचकबराबरी / अर्थ बताने में1 किलो = 1000 ग्राम · नभ = आकाश
जोड़ी जो उलझाती है: योजक (-) छोटा, शब्द जोड़ता है (माता-पिता) · निर्देशक (—) लंबा, कथन से पहले · उपविराम (:) एक बात समझाने से पहले · विवरण चिह्न (:-) पूरी सूची से पहले।
चिह्न बदला, अर्थ बदला ⚠️"रोको, मत जाने दो।" → उसे रोको · "रोको मत, जाने दो।" → मत रोको
"‘डॉ॰’ में कौन-सा चिह्न?" (लाघव) · "‘^’ का नाम?" (हंसपद / त्रुटिपूरक) · "किसी के कथन को ज्यों-का-त्यों लिखने में?" (दुहरा उद्धरण) · "सबसे अधिक रुकने का चिह्न?" (पूर्ण विराम) · "‘…’ का नाम?" (लोप चिह्न) · "‘धीरे-धीरे’ में कौन-सा चिह्न?" (योजक)
Read it? Now practise

Test yourself right away: today's 10 free GK questions, or a quick Fast Mode test.

Play today's GKTry Fast Mode

Ready for a full paper? Take a timed Super TET mock test with section-wise score. Super TET mock test →

← Previousअव्यय — क्रियाविशेषणNext →पर्यायवाची शब्द (1)

All chapters

TestTaiyari

One test a day. Real preparation.

CompanyAboutContactPricing
LegalTerms of UsePrivacy PolicyRefund Policy
⌂Home▦Exams✎Notes◉Today's GK▶Quiz ReelsNew✓My Tests