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Chapter 13 · Poetics

रस — अवयव और स्थायी भाव

Rasa: Components & Permanent Emotions
😊 रसकाव्य पढ़ने, सुनने या नाटक देखने से मन में जो आनंद जागे, वही रस है। विश्वनाथ: "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्" (रस = काव्य की आत्मा)।
📜 रस-सूत्र (भरतमुनि, नाट्यशास्त्र)"विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः" — विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी (संचारी) भाव के मेल से रस बनता है।
🔢 कितने रस?भरतमुनि: 8 (शांत नहीं) · बाद में शांत जुड़कर 9 (नवरस) · फिर वत्सल (10वाँ) और भक्ति (11वाँ)।

रस के 4 अवयव (अंग)

अवयवअर्थउपभेद / संख्या
1. स्थायी भावमन में स्थायी रूप से छिपा भाव, जो जागकर रस बनता है9 (रसों के अनुसार) + वत्सल, भक्ति के भाव
2. विभावभाव को जगाने वाले कारणआलंबन (= जिसके सहारे भाव जागे: विषय — जिसके प्रति, आश्रय — जिसके मन में) · उद्दीपन (= भाव को और बढ़ाने वाली स्थितियाँ: चाँदनी, उपवन, चेष्टाएँ)
3. अनुभावभाव जागने पर आश्रय की बाहरी चेष्टाएँ (= भाव के बाद होने वाले)4: कायिक (शरीर), वाचिक (वाणी) — कई पुस्तकों में इसकी जगह मानसिक, आहार्य (वेशभूषा), सात्त्विक (अपने-आप: स्तंभ, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग, कंप, वैवर्ण्य, अश्रु, प्रलय = 8)
4. संचारी (व्यभिचारी) भावपानी के बुलबुलों की तरह थोड़ी देर आने-जाने वाले भाव33 (नीचे सूची)
उदाहरण: वन में शकुंतला को देखकर दुष्यंत के मन में प्रेम जागा → स्थायी भाव: रति · आश्रय: दुष्यंत · आलंबन (विषय): शकुंतला · उद्दीपन: सुंदर उपवन, शकुंतला की चेष्टाएँ · अनुभाव: एकटक देखना, मुस्कुराना · संचारी: हर्ष, औत्सुक्य, लज्जा (व्रीड़ा) → रस: शृंगार

रस और उनके स्थायी भाव

रसस्थायी भावरसस्थायी भाव
शृंगार (रसराज)रति (प्रेम)भयानकभय
हास्यहासवीभत्सजुगुप्सा (घृणा)
करुणशोकअद्भुतविस्मय (आश्चर्य)
रौद्रक्रोधशांतनिर्वेद (शम, वैराग्य)
वीरउत्साहवत्सल · भक्तिवत्सलता (संतान-प्रेम) · भगवद्-विषयक रति (अनुराग)
33 संचारी भावनिर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, मद, श्रम, आलस्य, दैन्य, चिंता, मोह, स्मृति, धृति, व्रीड़ा (लज्जा), चपलता, हर्ष, आवेग, जड़ता, गर्व, विषाद, औत्सुक्य, निद्रा, अपस्मार, सुप्त (स्वप्न), विबोध, अमर्ष, अवहित्था (भाव छिपाना), उग्रता, मति, व्याधि, उन्माद, मरण, त्रास, वितर्क
"वीभत्स रस का स्थायी भाव?" (जुगुप्सा) · "शांत रस का स्थायी भाव?" (निर्वेद) · "रसराज किसे कहते हैं?" (शृंगार) · "संचारी भावों की संख्या?" (33) · "रस-सूत्र किसने दिया?" (भरतमुनि) · "सात्त्विक अनुभाव कितने?" (8) · "आलंबन के दो भाग?" (आश्रय, विषय)

रस की पहचान — उदाहरण Identifying Rasa

रसउदाहरणपहचान
शृंगार — संयोग"बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। सौंह करै भौंहनि हँसै, दैन कहै नटि जाय॥" (बिहारी)प्रेमी-प्रेमिका साथ; गोपियों की छेड़छाड़
शृंगार — वियोग (विप्रलंभ)"निसिदिन बरसत नैन हमारे। सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जब तें स्याम सिधारे॥" (सूरदास)प्रिय से दूरी का दुख
हास्य"हाथी जैसी देह है, गैंडे जैसी चाल। तरबूजे-सी खोपड़ी, खरबूजे-से गाल॥"विचित्र रूप, बात → हँसी
करुण"प्रिय पति, वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है? दुख-जलनिधि डूबी का सहारा कहाँ है?" (हरिऔध — प्रियप्रवास; कृष्ण के मथुरा जाने पर यशोदा का विलाप)प्रिय के नाश / बिछुड़ने का शोक; माता-पिता का संतान के लिए विलाप पाठ्यपुस्तकों में करुण माना जाता है
रौद्र"श्रीकृष्ण के सुन वचन, अर्जुन क्षोभ से जलने लगे। सब शील अपना भूल कर, करतल युगल मलने लगे॥"अपमान / अन्याय पर क्रोध; आँखें लाल, हाथ मलना
वीर"बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥" (सुभद्राकुमारी चौहान)युद्ध, दान, दया, धर्म के लिए उत्साह
भयानक"एक ओर अजगरहिं लखि, एक ओर मृगराय। विकल बटोही बीच ही, परयो मूरछा खाय॥"डरावनी वस्तु → भय, मूर्छा
वीभत्स"सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत। खींचत जीभहिं स्यार, अतिहि आनंद उर धारत॥"घिनौना दृश्य → जुगुप्सा
अद्भुत"अखिल भुवन चर-अचर सब, हरि मुख में लखि मात। चकित भई गद्गद बचन, विकसित दृग पुलकात॥"अनोखी बात → विस्मय
शांत"मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूँद बिनसि जाय छिन में, गरब करै क्या इतना॥" (कबीर)संसार की नश्वरता, वैराग्य
वत्सल"मैया मैं नहिं माखन खायो" · "जसोदा हरि पालनैं झुलावै" (सूरदास)माता-पिता का संतान-प्रेम
भक्ति"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई" (मीराबाई)ईश्वर के प्रति अनुराग
करुण या वियोग शृंगार? प्रेमी-प्रेमिका के बिछोह में फिर मिलने की आशा → वियोग शृंगार (गोपियाँ और कृष्ण) · मृत्यु / स्थायी बिछोह → करुण · माता-पिता का संतान के लिए शोक → करुण (शृंगार केवल प्रेमी-प्रेमिका का)।
रौद्र या वीर? दोनों में शत्रु, पर रौद्र = क्रोध (आँखें लाल, मर्यादा भूलना) · वीर = उत्साह (कर्तव्य, साहस)। वत्सल = बच्चे के प्रति, भक्ति = ईश्वर के प्रति।
पहचान का क्रम: (1) पंक्ति में कौन-सा भाव सबसे ज़्यादा है? (2) उस भाव का रस बताओ। ‘मरना, हाय, रोना’ → करुण · ‘क्रोध, लाल आँखें’ → रौद्र · ‘डर, काँपना’ → भयानक · ‘घिन, माँस, कौआ’ → वीभत्स · ‘चकित, अचरज’ → अद्भुत।
"‘निसिदिन बरसत नैन हमारे’ में रस?" (वियोग शृंगार) · "‘सिर पर बैठ्यो काग…’ में रस?" (वीभत्स) · "‘खूब लड़ी मर्दानी…’ में रस?" (वीर) · "‘मैया मैं नहिं माखन खायो’?" (वत्सल) · "‘मन रे तन कागद का पुतला’?" (शांत) · "‘अखिल भुवन चर-अचर सब…’?" (अद्भुत)

रस — व्याख्याकार, भेद और विशेष तथ्य Rasa: Commentators & Key Facts

रस-सूत्र के 4 प्रमुख व्याख्याकार

आचार्यमत (वाद)सार
भट्ट लोल्लटउत्पत्तिवाद (आरोपवाद)रस मूल पात्र (राम आदि) में उत्पन्न होता है, अभिनेता पर आरोपित
श्री शंकुकअनुमितिवाददर्शक अभिनेता को देखकर पात्र के भाव का अनुमान करता है
भट्टनायकभुक्तिवाद (भोगवाद)साधारणीकरण से सहृदय रस का भोग करता है
अभिनवगुप्तअभिव्यक्तिवाद — सबसे मान्यसहृदय के मन में पहले से स्थित स्थायी भाव ही रस के रूप में व्यक्त होता है
📌 किसने क्या कहा / जोड़ा"एको रसः करुण एव" (करुण ही एकमात्र रस) — भवभूति (उत्तररामचरित) · शांत रस को 9वाँ रस — उद्भट ने गिना, अभिनवगुप्त ने प्रतिष्ठित किया · वत्सल रस — विश्वनाथ (साहित्यदर्पण) · भक्ति रस — रूप गोस्वामी (भक्तिरसामृतसिंधु) · शृंगार = रसराज
⚔️ वीर रस के 4 भेदयुद्धवीर (युद्ध का उत्साह — झाँसी की रानी) · दानवीर (दान का उत्साह — कर्ण, हरिश्चंद्र) · दयावीर (दया का उत्साह — शिबि) · धर्मवीर (धर्म-रक्षा का उत्साह — युधिष्ठिर)
शृंगार के 2 भेद: संयोग, वियोग (विप्रलंभ)

रस-संख्या का क्रम

आचार्य / ग्रंथरस
भरतमुनि (नाट्यशास्त्र)8 — शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत (शांत नहीं; नाटक में शांत का अभिनय कठिन)
बाद के आचार्य9 (नवरस) — + शांत
विश्वनाथ · रूप गोस्वामी10 — + वत्सल · 11 — + भक्ति
प्रश्न: "अभिव्यक्तिवाद किसका मत है?" → अभिनवगुप्त (रस-सूत्र की सबसे मान्य व्याख्या)
प्रश्न: "दानवीर कर्ण की कथा में कौन-सा रस?" → उत्साह स्थायी भाव, दान के प्रति → वीर रस (दानवीर)
प्रश्न: "रस को काव्य की आत्मा किसने माना?" → विश्वनाथ: "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्"
व्याख्याकार क्रम से — "लो-शं-ना-अ": लोल्लट = उत्पत्ति · शंकुक = अनुमिति · भट्टनायक = भुक्ति · अभिनवगुप्त = अभिव्यक्ति।
"भट्टनायक का मत?" (भुक्तिवाद) · "‘एको रसः करुण एव’ किसने कहा?" (भवभूति) · "वत्सल रस को किसने मान्यता दी?" (विश्वनाथ) · "भक्ति रस के आचार्य?" (रूप गोस्वामी) · "वीर रस के कितने भेद?" (4) · "भरतमुनि ने कितने रस माने?" (8)
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