Chapter 7 · Hindi Grammar
क्रिया — कर्म के आधार पर भेद
Verb (Kriya): Transitive & Intransitive🏃 क्रियाजिस शब्द से किसी काम का करना या होना पता चले: पढ़ना, खाना, सोना, होना।
🌱 धातुक्रिया का मूल रूप: पढ़, लिख, खा, सो। धातु + ना = सामान्य रूप (पढ़ना)।
❓ कर्म की पहचानक्रिया से ‘क्या / किसे / किसको’ पूछो: उत्तर मिले → सकर्मक; न मिले → अकर्मक।
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक → एककर्मक | क्रिया का फल एक कर्म पर पड़े | राम फल खाता है (क्या खाता है? फल) · सीता पत्र लिखती है |
| सकर्मक → द्विकर्मक | दो कर्म: मुख्य कर्म (= जो वस्तु दी / पढ़ाई जाए, प्रायः निर्जीव) + गौण कर्म (= जिसे दी जाए, प्रायः प्राणी, ‘को’ के साथ) | अध्यापक ने छात्रों को (गौण) हिंदी (मुख्य) पढ़ाई · माँ ने बच्चे को दूध पिलाया · मैंने मोहन को पुस्तक दी |
| अकर्मक | कर्म नहीं, फल कर्ता पर | बच्चा सोता है · हँसना, रोना, जागना, दौड़ना, उठना, बैठना, चलना, आना, जाना, गिरना |
एक क्रिया, दोनों रूपपढ़ना, लिखना, खेलना कर्म हो तो सकर्मक, न हो तो अकर्मक: "बच्चा खेलता है" (अकर्मक) · "बच्चा क्रिकेट खेलता है" (सकर्मक)।
सजातीय कर्म (= उसी धातु से बना कर्म)अकर्मक क्रिया का कर्म उसी धातु से बना हो तो क्रिया सकर्मक: "सिपाही ने लड़ाई लड़ी" · "वह अच्छी चाल चलता है" · "उसने नाच नाचा"।
अपूर्ण क्रिया और पूरक
कुछ क्रियाएँ अकेले पूरा अर्थ नहीं देतीं; अर्थ पूरा करने वाला शब्द पूरक कहलाता है।
| भेद | क्रियाएँ | उदाहरण (मोटा = पूरक) |
|---|---|---|
| अपूर्ण अकर्मक | होना, बनना, निकलना, कहलाना, दिखना | वह बीमार है · गांधीजी महात्मा कहलाए · वह चोर निकला |
| अपूर्ण सकर्मक | मानना, बनाना, समझना, चुनना | लोगों ने उसे मुखिया चुना · मैं तुम्हें भाई मानता हूँ |
प्रश्न: "माँ ने बच्चे को दूध पिलाया" — क्रिया? → कर्म दो: दूध (मुख्य), बच्चे को (गौण) → द्विकर्मक सकर्मक।
प्रश्न: "वह चतुर निकला" — ‘चतुर’ क्या है? → ‘निकला’ का अर्थ पूरा कर रहा है → पूरक (क्रिया अपूर्ण अकर्मक)।
प्रश्न: "वह चतुर निकला" — ‘चतुर’ क्या है? → ‘निकला’ का अर्थ पूरा कर रहा है → पूरक (क्रिया अपूर्ण अकर्मक)।
दो कर्म पहचानने को दो प्रश्न: ‘क्या?’ → मुख्य कर्म (दूध, हिंदी, पुस्तक) · ‘किसको?’ → गौण कर्म (बच्चे को, छात्रों को)।
"‘माँ ने बच्चे को दूध पिलाया’ में क्रिया?" (द्विकर्मक) · "अकर्मक क्रिया चुनो: लिखना / सोना / खाना" (सोना) · "‘सिपाही ने लड़ाई लड़ी’ में ‘लड़ाई’?" (सजातीय कर्म) · "सकर्मक क्रिया के भेद?" (एककर्मक, द्विकर्मक) · "‘वह बीमार है’ में ‘बीमार’?" (पूरक) · "गौण कर्म किसे कहते हैं?"
क्रिया — रचना के आधार पर भेद Causative, Denominative & Other Verbs
प्रेरणार्थक क्रिया — कर्ता खुद न करके करवाए
| मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक (-आना) | द्वितीय प्रेरणार्थक (-वाना) |
|---|---|---|
| पढ़ना | पढ़ाना | पढ़वाना |
| सोना | सुलाना | सुलवाना |
| खाना · पीना | खिलाना · पिलाना | खिलवाना · पिलवाना |
| देना · रोना | दिलाना · रुलाना | दिलवाना · रुलवाना |
| करना · लिखना | कराना · लिखाना | करवाना · लिखवाना |
प्रथम प्रेरणार्थककर्ता सीधे स्वयं प्रेरणा देता है / काम में साथ रहता है: "माँ बच्चे को सुलाती है" · "अध्यापक छात्रों को पढ़ाते हैं"।
द्वितीय प्रेरणार्थककर्ता किसी दूसरे के द्वारा (बीच में एक और व्यक्ति) काम करवाता है: "माँ आया से बच्चे को सुलवाती है" · "प्रधानाचार्य अध्यापक से छात्रों को पढ़वाते हैं"।
आना, जाना, होना, सकना जैसी क्रियाओं के प्रेरणार्थक रूप नहीं बनते। प्रेरणार्थक बनाने पर अकर्मक क्रिया प्रायः सकर्मक हो जाती है: सोना (अकर्मक) → सुलाना (सकर्मक)।
अन्य भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| नामधातु | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण से बनी क्रिया | हाथ → हथियाना · बात → बतियाना · लाज → लजाना · शर्म → शर्माना · फ़िल्म → फ़िल्माना · अपना → अपनाना · चिकना → चिकनाना · गरम → गरमाना · साठ → सठियाना · लालच → ललचाना |
| अनुकरणात्मक (= आवाज़ की नकल से बनी) | ध्वनि को दोहराकर बनी | खटखट → खटखटाना · थरथर → थरथराना · भिनभिन → भिनभिनाना · हिनहिन → हिनहिनाना |
| पूर्वकालिक | मुख्य क्रिया से पहले पूरी हुई क्रिया (-कर, -के) | वह खाना खाकर सो गया · राम नहाकर मंदिर गया |
| संयुक्त | दो क्रियाएँ: मुख्य + रंजक (= अर्थ में नया रंग देने वाली) | खा लिया · रो पड़ा · चल दिया — विस्तार अगले पेज पर |
प्रश्न: "मालिक ने नौकर से गाड़ी धुलवाई" — क्रिया? → मालिक खुद नहीं धो रहा, नौकर के द्वारा → द्वितीय प्रेरणार्थक
प्रश्न: ‘ललचाना’ किससे बनी? → ‘लालच’ (संज्ञा) → नामधातु
प्रश्न: ‘ललचाना’ किससे बनी? → ‘लालच’ (संज्ञा) → नामधातु
-आ (पढ़ाना) = सीधी प्रेरणा · -वा (पढ़वाना) = किसी दूसरे ‘से’ करवाना।
"‘बतियाना’ किस प्रकार की क्रिया?" (नामधातु) · "‘पढ़वाना’ कौन-सा प्रेरणार्थक?" (द्वितीय) · "‘सुलाना’ किस क्रिया का प्रथम प्रेरणार्थक?" (सोना) · "‘खटखटाना’?" (अनुकरणात्मक) · "‘खाकर’ कौन-सी क्रिया?" (पूर्वकालिक)
संयुक्त क्रिया और सहायक क्रिया Compound & Auxiliary Verbs
🔗 संयुक्त क्रियामुख्य क्रिया + रंजक क्रिया (लेना, देना, पड़ना, जाना, चुकना, सकना…) — दूसरी क्रिया अर्थ में नया रंग (पूर्णता, अचानक, क्षमता…) जोड़ती है: "उसने खाना खा लिया" · "बच्चा रो पड़ा"
🧩 सहायक क्रियाकेवल काल / पक्ष (= काम चल रहा है या पूरा हुआ) बताती है, नया अर्थ नहीं: है, था, होगा, रहा — "वह खा रहा है" · "मैं पढ़ता था"। यहाँ मुख्य क्रिया एक ही (खाना, पढ़ना)।
जाल वाला जोड़ा: "खा लिया" → संयुक्त क्रिया (‘लेना’ ने पूर्णता का भाव जोड़ा) · "खा रहा है" → मुख्य क्रिया + सहायक क्रिया (केवल काल)। ‘रहा, है, था’ देखकर संयुक्त क्रिया मत चुनो।
संयुक्त क्रिया के भेद (अर्थ के आधार पर)
| भेद | रंजक / सूचक क्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| आरंभबोधक | लगना | वह पढ़ने लगा · वर्षा होने लगी |
| समाप्तिबोधक | चुकना | वह खाना खा चुका · मैं पढ़ चुका हूँ |
| अवकाशबोधक | पाना | मैं समय पर पहुँच न पाया · वह सो नहीं पाई |
| अनुमतिबोधक | देना | मुझे जाने दो · उसे खेलने दीजिए |
| नित्यताबोधक | करना (भूत रूप + करना) | वह रोज़ पढ़ा करता है · हम सुबह टहला करते थे |
| आवश्यकताबोधक | चाहिए, पड़ना, होना | तुम्हें पढ़ना चाहिए · मुझे जाना पड़ा · उसे आना है |
| निश्चयबोधक | देना, पड़ना, जाना, लेना, बैठना | वह चल दिया · पेड़ गिर पड़ा · वह बोल बैठा |
| इच्छाबोधक | चाहना | वह घर जाना चाहता है |
| शक्तिबोधक | सकना | वह तेज़ दौड़ सकता है |
| पुनरुक्त | दो सार्थक क्रियाएँ साथ | पढ़ना-लिखना · आना-जाना · मिलना-जुलना · खाना-पीना |
प्रश्न: "वह गाने लगा" — संयुक्त क्रिया का भेद? → ‘लगना’ = शुरुआत → आरंभबोधक
प्रश्न: "मुझे वहाँ जाना पड़ा" → मजबूरी / ज़रूरत → आवश्यकताबोधक
प्रश्न: "वह पढ़ा करता है" → रोज़ की आदत → नित्यताबोधक
प्रश्न: "मुझे वहाँ जाना पड़ा" → मजबूरी / ज़रूरत → आवश्यकताबोधक
प्रश्न: "वह पढ़ा करता है" → रोज़ की आदत → नित्यताबोधक
लगना = शुरू · चुकना = खत्म · पाना = मौका · देना (जाने दो) = इजाज़त · सकना = ताकत · चाहिए / पड़ना = ज़रूरत · चाहना = इच्छा · ‘-आ करना’ = आदत।
"‘वह खाना खा चुका’ में संयुक्त क्रिया का भेद?" (समाप्तिबोधक) · "‘मुझे जाने दो’?" (अनुमतिबोधक) · "‘वह दौड़ सकता है’?" (शक्तिबोधक) · "संयुक्त क्रिया का उदाहरण चुनो: खा रहा है / खा लिया" (खा लिया) · "‘आना-जाना’ कौन-सी संयुक्त क्रिया?" (पुनरुक्त)
काल — भूत, वर्तमान, भविष्य Tense (Kaal)
क्रिया के जिस रूप से समय पता चले, वह काल है। 3 मुख्य भेद: भूतकाल (बीता), वर्तमान (चल रहा), भविष्यत् (आने वाला)।
भूतकाल के 6 भेद
| भेद | पहचान (अंत में) | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य भूत | -आ, -ए, -ई (बस बीता; समय निश्चित नहीं) | राम ने खाना खाया · वह गया |
| आसन्न भूत | भूतकाल + है / हैं (अभी-अभी पूरा) | राम ने खाना खाया है · वह आया है |
| पूर्ण भूत | भूतकाल + था / थे / थी (बहुत पहले पूरा) | राम ने खाना खाया था · वह गया था |
| अपूर्ण भूत | रहा था / -ता था (काम चल रहा था) | राम खाना खा रहा था · वह पढ़ रही थी |
| संदिग्ध भूत | भूतकाल + होगा / होगी (संदेह) | राम ने खाना खाया होगा · वह गया होगा |
| हेतुहेतुमद् भूत (= यदि…तो) | यदि … -ता, तो … -ता (शर्त थी, काम हुआ नहीं) | यदि तुम पढ़ते तो पास होते · वर्षा होती तो फसल अच्छी होती |
वर्तमान काल के भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य वर्तमान | -ता है / -ती है / -ते हैं | वह पढ़ता है · बच्चे खेलते हैं |
| अपूर्ण (तात्कालिक) वर्तमान | रहा है / रही है (अभी चल रहा) | वह पढ़ रहा है · वर्षा हो रही है |
| पूर्ण वर्तमान | चुका है (काम अभी पूरा हुआ) | मैं पढ़ चुका हूँ · वह आ चुका है |
| संदिग्ध वर्तमान | -ता होगा / रहा होगा (अभी हो रहा, पर संदेह) | वह पढ़ता होगा · पिताजी आ रहे होंगे |
| संभाव्य वर्तमान | शायद / हो सकता है + -ता हो / रहा हो | शायद वह पढ़ता हो · हो सकता है वह आ रहा हो |
| आज्ञार्थ (विधि) वर्तमान | आज्ञा, अनुरोध: -ओ, -इए | तुम पढ़ो · आप बैठिए · कृपया शांत रहिए |
भविष्यत् काल के 3 भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य भविष्य | -एगा / -एगी / -एँगे | वह कल आएगा · हम मैच जीतेंगे |
| संभाव्य भविष्य | संभावना: -ए, -एँ (शायद, संभव है) | संभव है, कल वर्षा हो · शायद वह आए |
| हेतुहेतुमद् भविष्य | एक काम दूसरे पर निर्भर (आगे) | वह आए तो मैं जाऊँ · जो पढ़ेगा वह पास होगा |
कई पुस्तकें वर्तमान के 6 भेद देती हैं, कुछ 5। ‘मैं पढ़ चुका हूँ’ = पूर्ण वर्तमान या आसन्न भूत (पुस्तक के अनुसार) — विकल्प देखो। भूतकाल के 6 भेद सब में एक जैसे।
अंत का शब्द देखो: है (भूत क्रिया के साथ) → आसन्न · था → पूर्ण · रहा था → अपूर्ण · होगा (भूत क्रिया के साथ) → संदिग्ध · यदि…ता, तो…ता → हेतुहेतुमद्।
"‘उसने पत्र लिखा है’ में काल?" (आसन्न भूत) · "‘मैंने पत्र लिखा था’?" (पूर्ण भूत) · "‘यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती’?" (हेतुहेतुमद् भूत) · "‘बच्चा सो रहा है’?" (अपूर्ण / तात्कालिक वर्तमान) · "‘आप बैठिए’?" (आज्ञार्थ) · "भूतकाल के कितने भेद?" (6)
वाच्य — भेद और पहचान Voice (Vachya)
क्रिया के जिस रूप से पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव — किसकी प्रधानता है, उसे वाच्य कहते हैं। वाच्य के 3 भेद हैं।
| वाच्य | प्रधान | क्रिया किसके अनुसार | किन क्रियाओं में | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| कर्तृवाच्य | कर्ता | कर्ता के लिंग-वचन से (‘ने’ लगे तो कर्म से) | सकर्मक, अकर्मक दोनों | राम पत्र लिखता है · सीता हँसती है |
| कर्मवाच्य | कर्म | कर्म के लिंग-वचन से | केवल सकर्मक | राम द्वारा पत्र लिखा गया · पुस्तक पढ़ी जाती है |
| भाववाच्य | भाव (क्रिया) | सदा अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एकवचन | केवल अकर्मक | मुझसे चला नहीं जाता · बच्चों से सोया नहीं जाता |
🔍 पहचानसे / के द्वारा + सकर्मक + ‘जाना’ (गया, जाता, जाएगा) → कर्मवाच्य
से + अकर्मक + ‘जाना’ (प्रायः ‘नहीं’ के साथ, असमर्थता) → भाववाच्य
बाकी सामान्य वाक्य → कर्तृवाच्य
कर्मवाच्य / भाववाच्य में कर्ता के साथ लगा ‘से / द्वारा’ प्रायः करण कारक माना जाता है।
से + अकर्मक + ‘जाना’ (प्रायः ‘नहीं’ के साथ, असमर्थता) → भाववाच्य
बाकी सामान्य वाक्य → कर्तृवाच्य
कर्मवाच्य / भाववाच्य में कर्ता के साथ लगा ‘से / द्वारा’ प्रायः करण कारक माना जाता है।
📌 प्रयोग (क्रिया किसका अनुसरण करे)कर्तरि (= कर्ता के अनुसार): लड़की गाती है
कर्मणि (= कर्म के अनुसार): राम ने रोटी खाई
भावे (= न कर्ता, न कर्म के अनुसार; सदा पुल्लिंग एकवचन): सीता ने लड़कियों को बुलाया · मुझसे चला नहीं जाता
कर्मणि (= कर्म के अनुसार): राम ने रोटी खाई
भावे (= न कर्ता, न कर्म के अनुसार; सदा पुल्लिंग एकवचन): सीता ने लड़कियों को बुलाया · मुझसे चला नहीं जाता
प्रश्न: "लड़कियों से दौड़ा नहीं जाता" — वाच्य? → कर्ता के साथ ‘से’, क्रिया ‘दौड़ना’ अकर्मक, ‘जाता’, क्रिया पुल्लिंग एकवचन (कर्ता स्त्रीलिंग बहुवचन होने पर भी) → भाववाच्य।
प्रश्न: "सीता द्वारा गीत गाया गया" — वाच्य? → ‘गाना’ सकर्मक, कर्म ‘गीत’ के अनुसार ‘गाया गया’ → कर्मवाच्य।
प्रश्न: "राम ने सीता को बुलाया" — प्रयोग? → कर्म के साथ ‘को’ है, क्रिया न कर्ता न कर्म के अनुसार → भावे प्रयोग (वाच्य कर्तृवाच्य)।
प्रश्न: "सीता द्वारा गीत गाया गया" — वाच्य? → ‘गाना’ सकर्मक, कर्म ‘गीत’ के अनुसार ‘गाया गया’ → कर्मवाच्य।
प्रश्न: "राम ने सीता को बुलाया" — प्रयोग? → कर्म के साथ ‘को’ है, क्रिया न कर्ता न कर्म के अनुसार → भावे प्रयोग (वाच्य कर्तृवाच्य)।
वाच्य बदलने पर काल नहीं बदलता (पढ़ता है → पढ़ी जाती है; पढ़ेगा → पढ़ी जाएगी)। कर्मवाच्य प्रायः सूचना, सरकारी भाषा और असमर्थता में: "यात्रियों को सूचित किया जाता है", "मुझसे यह भोजन नहीं खाया जाता"।
‘द्वारा’ + कर्म के अनुसार क्रिया → कर्मवाच्य · ‘से’ + अकर्मक + ‘नहीं जाता’ → भाववाच्य · ‘ने / शून्य’ + सामान्य क्रिया → कर्तृवाच्य।
"‘मुझसे चला नहीं जाता’ में वाच्य?" (भाववाच्य) · "‘राम द्वारा रावण मारा गया’?" (कर्मवाच्य) · "कर्मवाच्य किस क्रिया में बनता है?" (सकर्मक) · "भाववाच्य में क्रिया का लिंग-वचन?" (पुल्लिंग, एकवचन) · "‘राम ने रोटी खाई’ में प्रयोग?" (कर्मणि) · "भाववाच्य किस क्रिया से बनता है?" (अकर्मक)
वाच्य परिवर्तन — हर काल में Changing the Voice
कर्तृ → कर्मवाच्य (केवल सकर्मक): कर्ता + के द्वारा (असमर्थता में से) · कर्म का ‘को’ हटाओ · मुख्य क्रिया का सामान्य भूत रूप (लिखा, पढ़ी) + ‘जाना’ उसी काल में · क्रिया कर्म के लिंग-वचन से
| काल / भाव | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
|---|---|---|
| सामान्य वर्तमान | राम पत्र लिखता है। | राम द्वारा पत्र लिखा जाता है। |
| अपूर्ण (प्रगतिशील) वर्तमान | राम पत्र लिख रहा है। | राम द्वारा पत्र लिखा जा रहा है। |
| सामान्य भूत | राम ने पत्र लिखा। | राम द्वारा पत्र लिखा गया। |
| आसन्न भूत | राम ने पत्र लिखा है। | राम द्वारा पत्र लिखा गया है। |
| पूर्ण भूत | राम ने पत्र लिखा था। | राम द्वारा पत्र लिखा गया था। |
| अपूर्ण भूत | राम पत्र लिख रहा था। | राम द्वारा पत्र लिखा जा रहा था। |
| सामान्य भविष्य | राम पत्र लिखेगा। | राम द्वारा पत्र लिखा जाएगा। |
| विधि / संभाव्य | राम पत्र लिखे। | राम द्वारा पत्र लिखा जाए। |
| आवश्यकता | राम को पत्र लिखना चाहिए। | राम द्वारा पत्र लिखा जाना चाहिए। |
| आज्ञा | दरवाज़ा बंद करो। | दरवाज़ा बंद किया जाए। |
| असमर्थता | मैं पत्र नहीं लिख सकता। | मुझसे पत्र नहीं लिखा जा सकता। |
सर्वनाम + द्वारामैं → मेरे द्वारा · हम → हमारे द्वारा · तुम → तुम्हारे द्वारा · आप → आपके द्वारा · वह → उसके द्वारा · वे → उनके द्वारा · यह → इसके द्वारा
"मैं पत्र लिखता हूँ" → "मेरे द्वारा पत्र लिखा जाता है" (‘मुझसे’ केवल असमर्थता में)
"मैं पत्र लिखता हूँ" → "मेरे द्वारा पत्र लिखा जाता है" (‘मुझसे’ केवल असमर्थता में)
कर्तृ → भाववाच्य (केवल अकर्मक)कर्ता + से · अकर्मक क्रिया का सामान्य भूत रूप (चला, सोया, हँसा) + ‘जाना’ · क्रिया सदा पुल्लिंग, एकवचन, अन्य पुरुष
मैं चल नहीं सकता → मुझसे चला नहीं जाता · सीता रात भर नहीं सोई → सीता से रात भर सोया नहीं गया · बच्चे नहीं हँसते → बच्चों से हँसा नहीं जाता · चलो, अब सोएँ → चलो, अब सोया जाए
मैं चल नहीं सकता → मुझसे चला नहीं जाता · सीता रात भर नहीं सोई → सीता से रात भर सोया नहीं गया · बच्चे नहीं हँसते → बच्चों से हँसा नहीं जाता · चलो, अब सोएँ → चलो, अब सोया जाए
प्रश्न: "पुलिस चोर को पकड़ेगी" का कर्मवाच्य? → पुलिस + द्वारा, ‘को’ हटाओ, पकड़ा + जाएगा (भविष्य, कर्म ‘चोर’ पुल्लिंग) → "पुलिस द्वारा चोर पकड़ा जाएगा"
प्रश्न: "वह कविता लिख रहा है" का कर्मवाच्य? → कर्म ‘कविता’ स्त्रीलिंग → "उसके द्वारा कविता लिखी जा रही है"
प्रश्न: "वह कविता लिख रहा है" का कर्मवाच्य? → कर्म ‘कविता’ स्त्रीलिंग → "उसके द्वारा कविता लिखी जा रही है"
"‘मैं पत्र लिखता हूँ’ का कर्मवाच्य?" (मेरे द्वारा पत्र लिखा जाता है) · "‘राम ने पत्र लिखा था’ का कर्मवाच्य?" (राम द्वारा पत्र लिखा गया था) · "‘दरवाज़ा बंद करो’ का कर्मवाच्य?" (दरवाज़ा बंद किया जाए) · "‘मैं नहीं सो सका’ का भाववाच्य?" (मुझसे सोया नहीं गया) · "‘लिखा जा रहा है’ किस काल का कर्मवाच्य?" (अपूर्ण वर्तमान)