Chapter 2 · Hindi Grammar
संधि — स्वर संधि
Sandhi: Vowel Sandhi🔗 संधिदो वर्णों (ध्वनियों) के मेल से होने वाला बदलाव। विद्या + आलय = विद्यालय
✂️ संधि-विच्छेदमिले हुए शब्द को फिर से अलग करना। सूर्योदय = सूर्य + उदय
3 भेदस्वर संधि (स्वर + स्वर) · व्यंजन संधि (व्यंजन + कोई) · विसर्ग संधि (ः + कोई)
स्वर संधि के 5 भेद क्रम से: दीर्घ – गुण – वृद्धि – यण – अयादि → “दीगु वृय अ”। पहचान: बना चिह्न — आ/ई/ऊ = दीर्घ · ए/ओ/अर् = गुण · ऐ/औ = वृद्धि · य्/व्/र् = यण · अय्/आय्/अव्/आव् = अयादि
| संधि | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. दीर्घ समान स्वर मिलकर दीर्घ | अ/आ + अ/आ = आ | विद्या + आलय = विद्यालय · हिम + आलय = हिमालय · धर्म + अर्थ = धर्मार्थ |
| इ/ई + इ/ई = ई | रवि + इंद्र = रवींद्र · गिरि + ईश = गिरीश · मही + इंद्र = महींद्र | |
| उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ | भानु + उदय = भानूदय · सु + उक्ति = सूक्ति · लघु + ऊर्मि = लघूर्मि | |
| 2. गुण | अ/आ + इ/ई = ए | देव + इंद्र = देवेंद्र · नर + ईश = नरेश · महा + ईश = महेश |
| अ/आ + उ/ऊ = ओ | सूर्य + उदय = सूर्योदय · महा + उत्सव = महोत्सव · जल + ऊर्मि = जलोर्मि | |
| अ/आ + ऋ = अर् | देव + ऋषि = देवर्षि · महा + ऋषि = महर्षि · सप्त + ऋषि = सप्तर्षि | |
| 3. वृद्धि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ | सदा + एव = सदैव · एक + एक = एकैक · मत + ऐक्य = मतैक्य |
| अ/आ + ओ/औ = औ | वन + औषधि = वनौषधि · जल + ओघ = जलौघ · महा + औषध = महौषध | |
| 4. यण आगे भिन्न स्वर | इ/ई + भिन्न स्वर = य् | इति + आदि = इत्यादि · यदि + अपि = यद्यपि · प्रति + एक = प्रत्येक · अति + अधिक = अत्यधिक |
| उ/ऊ + भिन्न स्वर = व् | सु + आगत = स्वागत · अनु + अय = अन्वय · सु + अच्छ = स्वच्छ | |
| ऋ + भिन्न स्वर = र् | पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा · मातृ + आनंद = मात्रानंद | |
| 5. अयादि ए ऐ ओ औ + भिन्न स्वर | ए → अय् | ने + अन = नयन · शे + अन = शयन |
| ऐ → आय् | गै + अक = गायक · नै + अक = नायक | |
| ओ → अव् | पो + अन = पवन · भो + अन = भवन · पो + इत्र = पवित्र | |
| औ → आव् | पौ + अक = पावक · नौ + इक = नाविक · पौ + अन = पावन |
यण में पहले शब्द के इ/उ/ऋ आधे य्/व्/र् बनते हैं — इसलिए विच्छेद में आधा वर्ण ढूँढो: इत्यादि में त्य, स्वागत में स्व।
प्रश्न: ‘नायक’ का संधि-विच्छेद? → नै + अक (ऐ + अ = आय्) — अयादि
प्रश्न: ‘महर्षि’ में कौन-सी संधि? → महा + ऋषि — गुण
प्रश्न: ‘महर्षि’ में कौन-सी संधि? → महा + ऋषि — गुण
"‘सदैव’ का संधि-विच्छेद?" · "‘इत्यादि’ में कौन-सी संधि?" (यण) · "‘हिमालय’ किस संधि का उदाहरण?" (दीर्घ) · "‘पवन’ का सही विच्छेद चुनो" (पो + अन) · "‘अ + ऋ = अर्’ किस संधि का नियम है?" (गुण)
व्यंजन संधि और विसर्ग संधि Consonant & Visarga Sandhi
व्यंजन संधि — व्यंजन + स्वर या व्यंजन
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| वर्ग का पहला वर्ण (क् च् ट् त् प्) + स्वर / वर्ग का 3-4 वर्ण / य र ल व → उसी वर्ग का तीसरा (ग् ज् ड् द् ब्) | दिक् + अंबर = दिगंबर · वाक् + ईश = वागीश · दिक् + गज = दिग्गज · षट् + आनन = षडानन · सत् + आचार = सदाचार · जगत् + ईश = जगदीश · अप् + ज = अब्ज |
| वर्ग का पहला वर्ण + न / म → उसी वर्ग का पाँचवाँ (ङ् ञ् ण् न् म्) | वाक् + मय = वाङ्मय · षट् + मास = षण्मास · जगत् + नाथ = जगन्नाथ · उत् + नति = उन्नति · चित् + मय = चिन्मय |
| त् + च/छ → च्च/च्छ · ज/झ → ज्ज · ट/ड → ट्ट/ड्ड · ल → ल्ल | उत् + चारण = उच्चारण · सत् + जन = सज्जन · उत् + ज्वल = उज्ज्वल · उत् + डयन = उड्डयन · उत् + लास = उल्लास · तत् + लीन = तल्लीन |
| त् + श → च्छ · त् + ह → द्ध | उत् + श्वास = उच्छ्वास · सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र · उत् + हार = उद्धार · तत् + हित = तद्धित |
| स्वर + छ → च्छ | वि + छेद = विच्छेद · परि + छेद = परिच्छेद · अनु + छेद = अनुच्छेद |
| म् + क से म तक कोई वर्ण → अनुस्वार (या उसी वर्ग का 5वाँ) · म् + म → म्म | सम् + कल्प = संकल्प · सम् + तोष = संतोष · सम् + पूर्ण = संपूर्ण · सम् + मति = सम्मति |
| म् + य र ल व श ष स ह → अनुस्वार | सम् + योग = संयोग · सम् + वाद = संवाद · सम् + सार = संसार · सम् + हार = संहार |
| ऋ, र, ष के बाद न → ण | परि + नाम = परिणाम · प्र + नाम = प्रणाम · परि + मान = परिमाण · राम + अयन = रामायण |
| अ/आ से भिन्न स्वर के बाद प्रायः स → ष | अभि + सेक = अभिषेक · वि + सम = विषम · नि + सिद्ध = निषिद्ध |
विशेष: सम् + कृत = संस्कृत, सम् + कार = संस्कार (बीच में ‘स्’ जुड़ता है) · परि + कार = परिष्कार · सम् + राट् = सम्राट (अपवाद — बाकी म् + र में अनुस्वार ही: संरक्षण, संरचना)।
अक्सर पूछे जाने वाले व्यंजन संधि विच्छेद
| शब्द | विच्छेद | शब्द | विच्छेद | शब्द | विच्छेद |
|---|---|---|---|---|---|
| उल्लेख | उत् + लेख | सद्भावना | सत् + भावना | उद्घाटन | उत् + घाटन |
| वाग्दान | वाक् + दान | तन्मय | तत् + मय | दिग्दर्शन | दिक् + दर्शन |
| सन्मार्ग | सत् + मार्ग | उन्नयन | उत् + नयन | सच्चिदानंद | सत् + चित् + आनंद |
प्रश्न: ‘जगन्नाथ’ का विच्छेद? → जगत् + नाथ (त् + न = न्न) — व्यंजन संधि
प्रश्न: ‘उद्धार’? → उत् + हार (त् + ह = द्ध)
प्रश्न: ‘उद्धार’? → उत् + हार (त् + ह = द्ध)
विच्छेद में पहले शब्द का अंतिम वर्ण हलंत (क्, त्, म्) हो, या बदलाव व्यंजन में हो (वि + छेद, अभि + सेक), तो व्यंजन संधि। ‘सम्’ से बने शब्द — संकल्प, संयोग, संसार, सम्मान — सब व्यंजन संधि।
"‘उज्ज्वल’ में कौन-सी संधि?" (व्यंजन) · "‘दिग्गज’ का विच्छेद?" (दिक् + गज) · "‘संसार’ = ?" (सम् + सार) · "‘परिणाम’ में न का ण क्यों?" (र के बाद) · "‘अभिषेक’ का विच्छेद?" (अभि + सेक) · "‘संस्कृत’ = ?" (सम् + कृत)
विसर्ग संधि Visarga Sandhi
विसर्ग संधि — विसर्ग (ः) + स्वर या व्यंजन
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| ः + च/छ → श् · ट/ठ → ष् · त/थ → स् | निः + चल = निश्चल · दुः + चरित्र = दुश्चरित्र · धनुः + टंकार = धनुष्टंकार · नमः + ते = नमस्ते · मनः + ताप = मनस्ताप |
| अ + ः + अ / वर्ग का 3-4-5 / य र ल व ह → ओ | मनः + बल = मनोबल · यशः + दा = यशोदा · मनः + रंजन = मनोरंजन · अधः + गति = अधोगति · तपः + भूमि = तपोभूमि · मनः + अनुकूल = मनोनुकूल |
| इ/उ + ः + स्वर / घोष वर्ण → र् | निः + आशा = निराशा · दुः + उपयोग = दुरुपयोग · निः + गुण = निर्गुण · दुः + बल = दुर्बल · निः + धन = निर्धन · आशीः + वाद = आशीर्वाद |
| अ/आ + ः (जो मूल में र् था: पुनर्, अंतर्) + स्वर/घोष → र् | पुनः + जन्म = पुनर्जन्म · अंतः + गत = अंतर्गत · पुनः + आगमन = पुनरागमन |
| इ/उ + ः + र → ः लोप, पहला स्वर दीर्घ | निः + रोग = नीरोग · निः + रस = नीरस · निः + रव = नीरव |
| इ/उ + ः + क/ख/प/फ → ष् | निः + कपट = निष्कपट · दुः + कर्म = दुष्कर्म · निः + पाप = निष्पाप · निः + फल = निष्फल |
| कुछ शब्दों में ः + क/प → स् | नमः + कार = नमस्कार · पुरः + कार = पुरस्कार |
| अ + ः + क/ख/प/फ → प्रायः ः ज्यों का त्यों | प्रातः + काल = प्रातःकाल · अंतः + करण = अंतःकरण · अधः + पतन = अधःपतन |
| ः + श/ष/स → वही वर्ण या ः ज्यों का त्यों | निः + संदेह = निस्संदेह / निःसंदेह · दुः + शासन = दुश्शासन / दुःशासन |
| अ + ः + अ से भिन्न स्वर → ः लोप | अतः + एव = अतएव |
‘मनोरथ’ = मनः + रथ (अः + र = ओ) · ‘निराशा’ = निः + आशा (इः + स्वर = र्)
प्रायः: विच्छेद में ः = विसर्ग; बदलाव व्यंजन में (त्, क्, म्, छ, स) = व्यंजन; दोनों ओर स्वर और बदलाव स्वर में = स्वर संधि।
तीनों संधियाँ एक नज़र में — पहचान के उदाहरण
| शब्द | विच्छेद | संधि | शब्द | विच्छेद | संधि |
|---|---|---|---|---|---|
| परमात्मा | परम + आत्मा | दीर्घ | सज्जन | सत् + जन | व्यंजन |
| गणेश | गण + ईश | गुण | संकल्प | सम् + कल्प | व्यंजन |
| महौषध | महा + औषध | वृद्धि | नमस्ते | नमः + ते | विसर्ग |
| प्रत्येक | प्रति + एक | यण | निर्धन | निः + धन | विसर्ग |
| पवित्र | पो + इत्र | अयादि | मनोबल | मनः + बल | विसर्ग |
| परोपकार | पर + उपकार | गुण | दुरात्मा | दुः + आत्मा | विसर्ग |
| अन्वेषण | अनु + एषण | यण | निष्काम | निः + काम | विसर्ग |
"‘निश्चल’ का संधि-विच्छेद?" · "‘नीरोग’ का सही विच्छेद?" (निः + रोग) · "निम्न में विसर्ग संधि वाला शब्द चुनो" · "‘दुर्बल’ का विच्छेद?" (दुः + बल) · "‘मनः + रंजन’ = ?" (मनोरंजन) · "‘अतएव’ का विच्छेद?" (अतः + एव)