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Chapter 1 · Hindi Grammar

वर्ण विचार — वर्णमाला

Letters, Vowels & Consonants
🔤 वर्ण = भाषा की सबसे छोटी ध्वनि, जिसके टुकड़े न हों (अ, क्)  ·  📚 वर्णमाला = वर्णों का क्रमबद्ध समूह (स्वर + व्यंजन)  ·  📜 लिपि = देवनागरी, बाएँ से दाएँ, ब्राह्मी लिपि से विकसित

स्वर (Vowels) — 11: अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ बिना दूसरे वर्ण की मदद के बोले जाते हैं

आधारभेदस्वर
उच्चारण में लगा समय (मात्रा)ह्रस्व (1 मात्रा) — मूल स्वरअ, इ, उ, ऋ
दीर्घ (2 मात्रा)आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
प्लुत (3 मात्रा, ‘३’ से दिखाते हैं)ओ३म्, हे रा३म
बनावटसंयुक्त स्वर / संध्यक्षर (दो स्वरों के मेल से)ए = अ+इ, ऐ = अ+ए, ओ = अ+उ, औ = अ+ओ
✏️ मात्राएँस्वर जब व्यंजन से जुड़ता है तो उसका चिह्न मात्रा कहलाता है।
का कि की कु कू कृ के कै को कौ
‘अ’ की कोई मात्रा नहीं — हर व्यंजन में ‘अ’ छिपा है (क = क् + अ)। ‘र’ के साथ: रु (रुपया), रू (रूप)।
🔈 अयोगवाह (न स्वर, न व्यंजन)अं — अनुस्वार (ं)  ·  अः — विसर्ग (ः)
ये स्वर के सहारे बोले जाते हैं। विसर्ग केवल तत्सम शब्दों में: अतः, प्रातः, दुःख, नमः। ऑ (ॉ) — आगत स्वर: डॉक्टर।

व्यंजन (Consonants) स्वर की मदद से बोले जाते हैं

भेदवर्णपहचान
स्पर्श — 25क-वर्ग: क ख ग घ ङ · च-वर्ग: च छ ज झ ञ · ट-वर्ग: ट ठ ड ढ ण · त-वर्ग: त थ द ध न · प-वर्ग: प फ ब भ मजीभ मुँह के किसी भाग को छूती है (च-वर्ग = स्पर्श-संघर्षी)
अंतःस्थ — 4य र ल वस्वर और व्यंजन के बीच; य, व = अर्धस्वर; र = लुंठित (प्रकंपित); ल = पार्श्विक
ऊष्म / संघर्षी — 4श ष स हबोलते समय हवा रगड़ खाकर (गर्म साँस) निकलती है
संयुक्त — 4क्ष = क्+ष  ·  त्र = त्+र  ·  ज्ञ = ज्+ञ  ·  श्र = श्+रदो व्यंजनों के मेल से; हिंदी में ज्ञ प्रायः ‘ग्य’ बोला जाता है
उत्क्षिप्त / द्विगुण — 2ड़ ढ़मूर्धन्य; जीभ उलटकर झटके से गिरती है; शब्द के आरंभ में नहीं आते
प्रचलित गिनती: 11 स्वर + 2 अयोगवाह + 33 मूल व्यंजन (25+4+4) + 4 संयुक्त + 2 उत्क्षिप्त = 52 (केवल 11 स्वर + 33 व्यंजन = 44)। किताबों में गिनती अलग मिलती है — प्रश्न में दिया आधार देखो। ऋ लिखने में स्वर है, बोलने में ‘रि’ जैसा।
"हिंदी में मूल स्वर कितने?" (4) · "अंतःस्थ व्यंजन कौन-से?" · "ऊष्म व्यंजन चुनो" · "क्ष किन वर्णों से बना?" (क्+ष) · "कौन-सा वर्ण शब्द के आरंभ में नहीं आता?" (ड़/ढ़) · "अयोगवाह क्या हैं?" · "प्लुत स्वर का उदाहरण?" (ओ३म्)

उच्चारण स्थान, प्राण और घोष Place & Manner of Articulation

गले (अंदर) सेहोंठ (बाहर) तक कंठ → कंठ्यअ आक ख ग घ ङह, विसर्ग (ः) तालु → तालव्यइ ईच छ ज झ ञय, श मूर्धा → मूर्धन्यऋट ठ ड ढ णर, ष दाँत → दंत्य(लृ)त थ द ध नल, स होंठ → ओष्ठ्यउ ऊप फ ब भ म—
कंठ-तालव्यए, ऐ
कंठोष्ठ्यओ, औ
दंतोष्ठ्यव (ऊपर के दाँत + निचला होंठ)
नासिक्यङ ञ ण न म, अनुस्वार (ं)
वर्ग याद करो: क-कंठ, च-तालु, ट-मूर्धा, त-दाँत, प-होंठ — क्रम गले से होंठ की ओर। तीनों ‘श’: श तालव्य, ष मूर्धन्य, स दंत्य।

प्राण (साँस) और घोष (नाद) के आधार पर

वर्ग12345
क-वर्गकखगघङ
च-वर्गचछजझञ
ट / त / प वर्गट त पठ थ फड द बढ ध भण न म
प्राणअल्पप्राणमहाप्राणअल्पप्राणमहाप्राणअल्पप्राण
घोषअघोषअघोषसघोषसघोषसघोष
💨 अल्पप्राण / महाप्राणअल्पप्राण (कम साँस): हर वर्ग का 1, 3, 5वाँ वर्ण + य र ल व + सभी स्वर।
महाप्राण (ज़्यादा साँस, ‘ह’ जैसी ध्वनि): हर वर्ग का 2, 4था वर्ण + श ष स ह।
🔔 अघोष / सघोषअघोष (स्वर-तंत्री में कंपन नहीं): हर वर्ग का 1, 2 + श ष स।
सघोष (कंपन): हर वर्ग का 3, 4, 5 + य र ल व ह + सभी स्वर।
ह = महाप्राण + सघोष + कंठ्य · सभी स्वर = सघोष, अल्पप्राण · पंचमाक्षर = नासिक्य, सघोष, अल्पप्राण
वर्ण-विच्छेद: प्रेम = प् + र् + ए + म् + अ  ·  विद्या = व् + इ + द् + य् + आ  ·  क्षमा = क् + ष् + अ + म् + आ  ·  कृष्ण = क् + ऋ + ष् + ण् + अ
आधुनिक किताबें र, ल, स, न को वर्त्स्य भी कहती हैं; परीक्षा में पारंपरिक उत्तर: र, ष मूर्धन्य; ल, स दंत्य।
"‘ष’ का उच्चारण स्थान?" (मूर्धा) · "ए, ऐ का उच्चारण स्थान?" (कंठ-तालु) · "महाप्राण वर्ण चुनो: क / ख / ग / ङ" · "कौन अघोष है: ग / ज / त / द" · "पंचमाक्षर कौन-से?" · "‘विद्या’ का सही वर्ण-विच्छेद?"

ध्वनि अंतर, अनुस्वार, ‘र’ के रूप Sounds, Nasals & Conjuncts

मिलती-जुलती ध्वनियों में अंतर

जोड़ीअंतरउदाहरण (अर्थ बदलता है)
श – ष – सश तालव्य, ष मूर्धन्य, स दंत्य; ष प्रायः तत्सम मेंशाला, भाषा, कृषि, षट्कोण, सदा · अंश (भाग) – अंस (कंधा)
ब – वब ओष्ठ्य (होंठ मिलते हैं), व दंतोष्ठ्यबन (बनना) – वन (जंगल) · बात – वात (हवा)
ड – ड़, ढ – ढ़ड, ढ आरंभ में, पंचमाक्षर के बाद, द्वित्व में; ड़, ढ़ बीच/अंत मेंडर, ढक्कन, डंडा, गड्ढा, लड्डू · सड़क, पढ़ना, बूढ़ा
क्ष – छक्ष = क्+ष (संयुक्त); छ एक वर्णक्षमा, कक्षा, रक्षा · छत, कछुआ
ण – नण शब्द के आरंभ में नहीं; तत्सम में ऋ, र, ष के बाद न → णऋण, कारण, प्राण, विष्णु, रामायण · नमक, नदी
ं अनुस्वारनाक से बोली व्यंजन ध्वनि: हंस (पक्षी), अंक, गंगा
ँ अनुनासिक (चंद्रबिंदु)स्वर मुँह + नाक से: हँस (हँसना), आँख, माँ
1. शिरोरेखा के ऊपर मात्रा (ि ी े ै ो ौ) हो तो ँ की जगह ं: में, मैं, नहीं (फिर भी अनुनासिक)।
2. पंचमाक्षर नियम: अनुस्वार = आगे वाले वर्ग का 5वाँ वर्ण: गंगा = गङ्गा, ठंडा = ठण्डा, अंत = अन्त, कंबल = कम्बल।
3. आगे य र ल व श ष स ह हों तो केवल ं: संयम, संवाद, संसार।  4. पंचमाक्षर दोहरा हो तो ं नहीं: अन्न, सम्मान।

संयुक्ताक्षर, द्वित्व और ‘र’ के रूप

संयुक्ताक्षरदो अलग व्यंजन: प्यास, विद्या (द्+य), बुद्धि। हलंत (्) = ‘अ’ नहीं।
द्वित्वएक ही व्यंजन दो बार: पक्का, बच्चा, उल्लास।
नुक़्ता (़)विदेशी ध्वनियाँ: क़ ख़ ग़ ज़ फ़। ड़, ढ़ बिंदु वाले पर हिंदी की अपनी ध्वनियाँ।
‘र’ का रूपकबउदाहरण
रेफ (ऊपर लगा आधा र)आधा र (र्) अगले वर्ण के ऊपर लगता है, पर बोला उससे पहले जाता हैकर्म (क-र्-म), धर्म, पर्व, सूर्य, दर्पण
पदेन (्र — नीचे तिरछी रेखा)पाई वाले व्यंजन के बाद पूरा रप्रकाश, क्रम, ग्राम, भ्रम · द के नीचे भी: द्रव, राजेंद्र
^ आकारबिना पाई वाले ट, ड के बाद रट्रक, राष्ट्र
ऋ की मात्रा (ृ)यह ‘र’ नहीं, स्वर ‘ऋ’ हैकृषि, गृह, मृग, हृदय
शब्दकोश क्रम: पहले ं/ँ, फिर मात्रा-क्रम (अ आ इ … औ)। क्ष ‘क’ में, त्र ‘त’ में, ज्ञ ‘ज’ में।
कमल, किताब, कंघा, काम → कंघा, कमल, काम, किताब (ं पहले, फिर क, का, कि)
"हँस / हंस में अंतर?" · "पंचमाक्षर के नियम से शुद्ध रूप चुनो" (ठण्डा) · "किसमें रेफ है: प्रकाश / कर्म / ट्रक" · "‘ण’ वाला शुद्ध शब्द चुनो: प्रमान / प्रमाण" · "शब्दकोश के अनुसार पहला शब्द?"
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