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Chapter 11 · Hindi Grammar

मुहावरा बनाम लोकोक्ति, प्रमुख मुहावरे

Idioms (Muhavare) — 1
आधारमुहावरालोकोक्ति (कहावत)
रूपवाक्यांश (अधूरा), प्रायः क्रिया (-ना) से अंत: "आँख का तारा होना" · ‘मुहावरा’ अरबी शब्द (= अभ्यास)पूरा वाक्य: "अधजल गगरी छलकत जाय" · लोक + उक्ति
प्रयोगअकेले नहीं, वाक्य के अंदर; लिंग, वचन, काल से रूप बदलता है (आग बबूला हुआ / हुई / होंगे)स्वतंत्र रूप से भी बोली जाती है; प्रायः नहीं बदलती
अर्थलाक्षणिक (= शब्दों का सीधा अर्थ नहीं, छिपा अर्थ)जीवन का अनुभव / सीख

प्रमुख मुहावरे (1)

मुहावराअर्थमुहावराअर्थ
अंगूठा दिखानाज़रूरत के समय साफ़ मना कर देनाईद का चाँद होनाबहुत दिनों बाद दिखना
अक्ल पर पत्थर पड़नाबुद्धि भ्रष्ट होनाउँगली उठानादोष लगाना
अक्ल का दुश्मनमूर्खउल्टी गंगा बहानानियम के विरुद्ध काम करना
अंधे की लाठीएकमात्र सहाराउल्लू सीधा करनाअपना स्वार्थ साधना
अँधेरे में तीर चलानाबिना जानकारी के अनुमान से काम करनाउल्लू बनानामूर्ख बनाना
अंगारों पर लोटनाईर्ष्या से जलनाएड़ी-चोटी का ज़ोर लगानापूरी शक्ति लगाना
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बननाअपनी प्रशंसा स्वयं करनाओखली में सिर देनाजानबूझकर मुसीबत में पड़ना
आँख का ताराबहुत प्याराकान भरनाचुगली करना
आँखों में धूल झोंकनाधोखा देनाकान खड़े होनासावधान / चौकन्ना होना
आँखें खुलनासचेत होना, भ्रम दूर होनाकान का कच्चाबिना सोचे हर बात मान लेने वाला
आँखें चुरानालज्जा / डर से सामने आने से बचनाकमर कसनातैयार होना
आँख दिखानाक्रोध से देखना, धमकानाकलई खुलनाअसलियत / भेद खुलना
आँखें बिछानाप्रेम से स्वागत करनाकलेजा ठंडा होनामन को संतोष मिलना
आँखों पर पर्दा पड़नासच्चाई न दिखनाकाम तमाम करनामार डालना
आग बबूला होनाबहुत क्रोधित होनाकाठ का उल्लूमहामूर्ख
आसमान सिर पर उठानाबहुत शोर करनाकिताबी कीड़ाहर समय पढ़ते रहने वाला
आसमान के तारे तोड़नाअसंभव काम करनाकीचड़ उछालनाबदनाम करना
आकाश-पाताल एक करनाबहुत प्रयत्न करनाकोल्हू का बैलदिन-रात काम में लगा रहने वाला
आस्तीन का साँपकपटी मित्रकुएँ में भाँग पड़नासबकी बुद्धि भ्रष्ट होना
आटे-दाल का भाव मालूम होनाकठिनाई का पता चलनाखून-पसीना एक करनाकठिन परिश्रम करना
आटे में नमकबहुत थोड़ाखाक छाननाभटकना
आपे से बाहर होनाक्रोध में होश खोनाख़याली पुलाव पकानामन में कल्पनाएँ करना
ईंट से ईंट बजानापूरी तरह नष्ट कर देना; कड़ा मुकाबला करनाखटाई में पड़नाकाम अटक जाना
"‘ईद का चाँद होना’ का अर्थ?" (बहुत दिनों बाद दिखना) · "‘गागर में सागर भरना’?" (थोड़े में बहुत कहना) · "‘आँखें बिछाना’?" (प्रेम से स्वागत) · "मुहावरा और लोकोक्ति में मुख्य अंतर?" (वाक्यांश बनाम पूरा वाक्य)

प्रमुख मुहावरे (2) Idioms (Muhavare) — 2

मुहावराअर्थमुहावराअर्थ
खिचड़ी पकानागुप्त योजना बनानाडींग हाँकनाबढ़-चढ़कर बातें करना
गागर में सागर भरनाथोड़े में बहुत कहनातिल का ताड़ बनानाछोटी बात को बड़ा बनाना
गिरगिट की तरह रंग बदलनामौका देखकर बदल जाना (अवसरवादी)तलवे चाटनाखुशामद करना
गड़े मुर्दे उखाड़नापुरानी बातें फिर छेड़नातारे गिननाबेचैनी में रात भर जागना
गुड़ गोबर करनाबना काम बिगाड़नाथाली का बैंगनसिद्धांतहीन, जिधर लाभ उधर
गुल खिलानाअनोखा / बुरा काम कर दिखानादाँतों तले उँगली दबानाआश्चर्यचकित होना
गले का हार होनाबहुत प्रिय होनादाल में काला होनासंदेह होना
गाँठ बाँधनाअच्छी तरह याद रखनादाँत खट्टे करनापराजित करना
गूलर का फूल होनादुर्लभ होनादाँत काटी रोटीगहरी मित्रता
घी के दीये जलानाखुशी मनानादिन दूना रात चौगुनातेज़ी से उन्नति
घोड़े बेचकर सोनानिश्चिंत होकर सोनादो नावों पर पैर रखनादो पक्षों में एक साथ रहना
घड़ों पानी पड़नाबहुत लज्जित होनाधूल चटानाबुरी तरह हराना
घाट-घाट का पानी पीनाबहुत अनुभवी होनानाक में दम करनाबहुत परेशान करना
घर फूँक तमाशा देखनाअपना नुकसान करके मौज करनानाक कटनाइज़्ज़त जाना
घुटने टेकनाहार मान लेनानाक रगड़नागिड़गिड़ाना
चिकना घड़ाजिस पर किसी बात का असर न होनानी याद आनाबहुत कष्ट होना
चार चाँद लगानाशोभा बढ़ानानमक-मिर्च लगानाबढ़ा-चढ़ाकर कहना
चुल्लू भर पानी में डूब मरनाअत्यंत लज्जित होनानौ दो ग्यारह होनाभाग जाना
चादर देखकर पैर फैलानाआय के अनुसार खर्च करनापानी-पानी होनाबहुत लज्जित होना
चिराग तले अँधेरापास की बुराई न दिखनापानी फेरनानष्ट / बेकार कर देना
चेहरे पर हवाइयाँ उड़नाघबरा जानापगड़ी उछालनाअपमान करना
छाती पर मूँग दलनापास रहकर दुख देनापत्थर की लकीरअमिट बात
छक्के छुड़ानाबुरी तरह हरानापहाड़ टूट पड़नाभारी विपत्ति आना
जले पर नमक छिड़कनादुखी को और दुखी करनापाँचों उँगलियाँ घी मेंलाभ ही लाभ
जान पर खेलनाजान जोखिम में डालनापीठ दिखानाभाग जाना
जी चुरानाकाम से बचनापेट में चूहे कूदनाबहुत भूख लगना
टस से मस न होनाअपनी बात पर अड़े रहनाफूला न समानाबहुत खुश होना
टेढ़ी खीरकठिन कामफूँक-फूँककर कदम रखनासावधानी से काम करना
ठन-ठन गोपालनिर्धन व्यक्तिबगलें झाँकनाजवाब न सूझना
"‘हाथ पीले करना’?" (विवाह करना) · "‘बहुत खुश होना’ के लिए मुहावरा?" (फूला न समाना / बाँछें खिलना) · "‘दाँत काटी रोटी’?" (गहरी मित्रता) · "‘टेढ़ी खीर’?" (कठिन काम)

प्रमुख मुहावरे (3), प्रयोग Idioms (Muhavare) — 3

मुहावराअर्थमुहावराअर्थ
बाल बाँका न होनाज़रा भी हानि न होनासिर आँखों पर बिठानाबहुत आदर करना
बाँछें खिलनाबहुत प्रसन्न होनासिर पर कफ़न बाँधनामरने को तैयार रहना
बाएँ हाथ का खेलबहुत आसान कामसोने पर सुहागाएक गुण के साथ दूसरा गुण
बात का धनीवचन का पक्काहाथ पीले करनाविवाह करना
बीड़ा उठानाज़िम्मेदारी लेनाहवा से बातें करनाबहुत तेज़ दौड़ना
भीगी बिल्ली बननाडर से दब जानाहथेली पर सरसों उगानाअसंभव काम जल्दी करना
भाड़ झोंकनाव्यर्थ समय गँवानाहाथ मलनापछताना
मुँह की खानाबुरी तरह हारनाहाथ-पैर फूलनाघबरा जाना
मुँह में पानी आनालालच आनाहाथ खड़े करनाअसमर्थता प्रकट करना
माथा ठनकनाअनहोनी का संदेह होनाहवाई किले बनानाकोरी कल्पनाएँ करना
मैदान मारनाजीत जानाहाथ धोकर पीछे पड़नापूरी तरह पीछे लग जाना
मक्खियाँ मारनाबेकार बैठे रहनाहाथों के तोते उड़नाहोश उड़ जाना
रंग में भंग पड़नाखुशी में विघ्न पड़नागुदड़ी का लालगरीब घर में जन्मा गुणी व्यक्ति
रंगे हाथों पकड़नाअपराध करते समय पकड़नापौ बारह होनाखूब लाभ होना
रँगा सियारकपटी, धोखेबाज़आड़े हाथों लेनाकड़ी फटकार लगाना
लोहे के चने चबानाबहुत कठिन काम करनाकलेजा मुँह को आनाबहुत दुखी या भयभीत होना
लकीर का फ़क़ीरपुरानी रीति पर आँख मूँदकर चलने वालालाल-पीला होनाक्रोध करना
लोहा माननाश्रेष्ठता स्वीकार करनादाँतों पसीना आनाबहुत कठिनाई / परिश्रम होना
श्रीगणेश करनाआरंभ करनाचाँदी काटनाखूब लाभ कमाना
सिर पर पैर रखकर भागनाबहुत तेज़ी से भागनाउड़ती चिड़िया पहचाननाबहुत चतुर होना, दूर से भाँप लेना
प्रश्न: "आग बबूला होना" का वाक्य में प्रयोग? → "झूठ सुनकर पिताजी आग बबूला हो गए।" (मुहावरा क्रिया की तरह बदला: हो गए)
प्रश्न: "नौ दो ग्यारह होना" का अर्थ? → गणित नहीं, छिपा अर्थ → भाग जाना ("पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।")
एक जैसे अर्थ वाले मुहावरे: बहुत लज्जित — पानी-पानी होना, घड़ों पानी पड़ना, चुल्लू भर पानी में डूब मरना · हराना — छक्के छुड़ाना, दाँत खट्टे करना, धूल चटाना · भाग जाना — नौ दो ग्यारह होना, पीठ दिखाना, रफ़ूचक्कर होना · घबराना — हाथ-पैर फूलना, हाथों के तोते उड़ना, चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना
"‘सिर पर कफ़न बाँधना’?" (मरने को तैयार रहना) · "‘लकीर का फ़क़ीर’?" (पुरानी रीति पर चलने वाला) · "‘हाथ मलना’?" (पछताना) · "रिक्त स्थान: वह परीक्षा में फेल होकर ___ (हाथ मलता रह गया)"

लोकोक्तियाँ — अर्थ (1) Proverbs (Lokoktiyan) — 1

प्रमुख लोकोक्तियाँ (1)

लोकोक्तिअर्थलोकोक्तिअर्थ
अधजल गगरी छलकत जायकम जानने वाला अधिक दिखावा करता हैमुँह में राम बगल में छुरीऊपर से मीठा, भीतर से कपटी
अंधों में काना राजामूर्खों के बीच थोड़ा जानने वाला भी श्रेष्ठसाँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटेकाम भी हो जाए और हानि भी न हो
अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेतसमय निकल जाने पर पछताना व्यर्थहोनहार बिरवान के होत चीकने पातहोनहार के लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं
आम के आम गुठलियों के दामदोहरा लाभहाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्याप्रत्यक्ष बात को प्रमाण की ज़रूरत नहीं
आ बैल मुझे मारजानबूझकर मुसीबत मोल लेनाअंधा क्या चाहे दो आँखेंमनचाही वस्तु बिना माँगे मिल जाना
उल्टा चोर कोतवाल को डाँटेदोषी उलटे निर्दोष पर दोष लगाएबिल्ली के भाग्य से छींका टूटासंयोग से काम बन जाना
ऊँची दुकान फीका पकवानदिखावा अधिक, गुण कमअपनी-अपनी डफली अपना-अपना रागसबकी अलग राय, आपस में मेल न होना
ऊँट के मुँह में जीराज़रूरत से बहुत कम मिलनादाल-भात में मूसलचंदबेवजह दखल देने वाला
एक अनार सौ बीमारवस्तु एक, चाहने वाले अनेकअपना हाथ जगन्नाथअपना काम स्वयं करना सबसे अच्छा
एक पंथ दो काजएक काम से दो लाभअकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकताअकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता
का बरखा जब कृषि सुखानेअवसर बीत जाने पर मदद बेकारआसमान से गिरा खजूर में अटकाएक संकट से निकलकर दूसरे में फँसना
खोदा पहाड़ निकली चुहियापरिश्रम बहुत, फल बहुत कमउलटे बाँस बरेली कोजहाँ जिस चीज़ की भरमार हो, वहीं उसे ले जाना (उलटा काम)
घर का भेदी लंका ढाएघर का भेद जानने वाला ही सबसे बड़ा नुकसान करता हैकहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेलीबड़े और छोटे की कोई तुलना नहीं
घर की मुर्गी दाल बराबरघर की वस्तु / व्यक्ति का आदर नहीं होताकाला अक्षर भैंस बराबरबिलकुल अनपढ़ होना
चोर की दाढ़ी में तिनकादोषी व्यक्ति स्वयं डरा-डरा रहता हैखरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता हैसंगति का असर पड़ता है
जल में रहकर मगर से बैरजिसके आश्रय में रहो, उससे शत्रुता ठीक नहींचार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रातसुख थोड़े दिन का होता है
जिसकी लाठी उसकी भैंसशक्तिशाली की ही जीत होती हैचोर-चोर मौसेरे भाईबुरे लोग आपस में मिले रहते हैं
जैसी करनी वैसी भरनीजैसा कर्म, वैसा फलजहाँ चाह वहाँ राहइच्छा हो तो उपाय मिल जाता है
थोथा चना बाजे घनागुणहीन व्यक्ति अधिक दिखावा करता हैजैसा देश वैसा भेषस्थान के अनुसार आचरण करना
दूर के ढोल सुहावनेदूर से चीज़ें अच्छी लगती हैंजो गरजते हैं वे बरसते नहींडींग मारने वाले काम नहीं करते
न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरीझगड़े का कारण ही मिटा देनाढाक के तीन पातसदा एक-सी दशा, नतीजा वही
नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी कमी दूसरों पर डालनातेते पाँव पसारिए जेती लाँबी सौरआय के अनुसार ही खर्च करो
नौ नकद न तेरह उधारनकद थोड़ा भी उधार के अधिक से अच्छादूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता हैएक बार धोखा खाने वाला बहुत सावधान रहता है
बंदर क्या जाने अदरक का स्वादमूर्ख गुण की कद्र नहीं जानतानेकी कर दरिया में डालभलाई करके भूल जाओ
भैंस के आगे बीन बजाए, भैंस खड़ी पगुरायमूर्ख को उपदेश देना व्यर्थबोए पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होयबुरे कर्म का अच्छा फल नहीं मिलता
"‘अधजल गगरी छलकत जाय’ का अर्थ?" (कम जानने वाला अधिक दिखावा करता है) · "‘दोहरा लाभ’ के लिए लोकोक्ति?" (आम के आम गुठलियों के दाम) · "‘का बरखा जब कृषि सुखाने’ का भाव?" (अवसर बीतने पर मदद व्यर्थ)

लोकोक्तियाँ — अर्थ (2) Proverbs (Lokoktiyan) — 2

प्रमुख लोकोक्तियाँ (2)

लोकोक्तिअर्थलोकोक्तिअर्थ
मन चंगा तो कठौती में गंगामन शुद्ध हो तो सब पवित्रडूबते को तिनके का सहारासंकट में छोटी मदद भी बड़ी
मान न मान मैं तेरा मेहमानज़बरदस्ती गले पड़नाधोबी का कुत्ता न घर का न घाट काकहीं का न रहना
रस्सी जल गई पर ऐंठन न गईसब नष्ट हो गया, फिर भी घमंड नहीं गयापढ़े फ़ारसी बेचे तेलयोग्यता के अनुसार काम न मिलना
सौ सुनार की एक लुहार कीकमज़ोर के सौ वार, बलवान का एक ही काफ़ीयथा राजा तथा प्रजाजैसा शासक, वैसी जनता
सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता हैएक ही दशा में रहने वाला सबको वैसा ही समझता हैआप भला तो जग भलास्वयं अच्छे तो सब अच्छे
हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के औरकहना कुछ, करना कुछएक तो करेला दूजे नीम चढ़ाएक दोष के साथ दूसरा दोष
अंधेर नगरी चौपट राजाअन्याय और कुशासनकंगाली में आटा गीलामुसीबत में और मुसीबत
एक म्यान में दो तलवारें नहीं रहतींदो समान अधिकारी साथ नहीं रह सकतेजिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठपरिश्रम करने वाले को ही फल मिलता है
कौआ चला हंस की चालदूसरों की नकल में अपनी चाल भी भूल जानालातों के भूत बातों से नहीं मानतेदुष्ट दंड से ही मानता है
तू डाल-डाल मैं पात-पातएक-दूसरे से बढ़कर चालाकअक्ल बड़ी या भैंसबुद्धि शारीरिक बल से बड़ी है
नक्कारखाने में तूती की आवाज़बड़ों के बीच छोटे की बात कोई नहीं सुनताऊधो का लेना न माधो का देनाकिसी से कोई मतलब न रखना
बगल में छोरा नगर में ढिंढोरापास की चीज़ को दूर-दूर ढूँढनाएक हाथ से ताली नहीं बजतीझगड़े में दोनों पक्ष दोषी होते हैं
आगे कुआँ पीछे खाईदोनों ओर संकटजैसे नागनाथ वैसे साँपनाथदोनों एक जैसे बुरे
ओस चाटे प्यास नहीं बुझतीथोड़ी वस्तु से बड़ी ज़रूरत पूरी नहीं होतीपर उपदेश कुशल बहुतेरेदूसरों को उपदेश देना आसान, स्वयं करना कठिन
काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़तीधोखा बार-बार नहीं चलतासिर मुँड़ाते ही ओले पड़ेकाम शुरू होते ही विघ्न आना
गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादासअवसरवादी व्यक्तिआधी छोड़ सारी को धावे, आधी रहे न सारी पावेअधिक लालच में हाथ की वस्तु भी खो देना
गुड़ खाए गुलगुलों से परहेज़दिखावटी परहेज़ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरकठिन काम हाथ में लिया तो कष्टों से क्या डरना
जाके पाँव न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराईजिसने दुख न सहा, वह दूसरों का दुख नहीं समझताअंधी पीसे कुत्ता खाएपरिश्रम कोई करे, लाभ कोई और उठाए
एक जैसे अर्थ वाली जोड़ियाँ: अधजल गगरी छलकत जाय = थोथा चना बाजे घना = जो गरजते हैं वे बरसते नहीं (दिखावा) · का बरखा जब कृषि सुखाने = अब पछताए होत क्या… (समय बीता) · आम के आम गुठलियों के दाम = एक पंथ दो काज (दोहरा लाभ) · तेते पाँव पसारिए… = चादर देखकर पैर फैलाना (आय के अनुसार खर्च)
प्रश्न: "बिना गुण वाला व्यक्ति बहुत डींग मारता है" → थोथा चना बाजे घना · "प्रचार बहुत, सामान घटिया" → ऊँची दुकान फीका पकवान · "परीक्षा के बाद पढ़ने बैठे हो?" → अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत
"‘ढाक के तीन पात’ का अर्थ?" (सदा एक-सी दशा) · "‘चोर-चोर मौसेरे भाई’?" (बुरे लोग आपस में मिले रहते हैं) · "‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’?" (एक दोष के साथ दूसरा) · "‘काला अक्षर भैंस बराबर’?" (अनपढ़)
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