Chapter 5 · Hindi Grammar
संज्ञा और उसके भेद
Noun (Sangya) & its Types📛 संज्ञाकिसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं: राम, किताब, दिल्ली, गाय, प्रेम।
🔄 विकारी शब्द(= रूप बदलने वाले शब्द) संज्ञा लिंग, वचन, कारक से बदलती है: लड़का → लड़की, लड़के, लड़कों ने।
🔢 कितने भेद?मुख्य 3: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक। आजकल की पुस्तकों में 5 (+ द्रव्यवाचक, समूहवाचक)।
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिवाचक | एक विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु का नाम | राम, गंगा, भारत, हिमालय, रामायण, ताजमहल, सोमवार, जनवरी, दीवाली |
| जातिवाचक | पूरी जाति / वर्ग का नाम | लड़का, नदी, पहाड़, शहर, पुस्तक, गाय, पेड़, किसान |
| भाववाचक | गुण, दशा, भाव — छू नहीं सकते, केवल अनुभव | बचपन, बुढ़ापा, मिठास, प्रेम, क्रोध, सुंदरता, थकान, गरीबी |
| द्रव्यवाचक | नापी-तौली जाए, गिनी न जाए | सोना, चाँदी, दूध, पानी, घी, तेल, लोहा, गेहूँ, कोयला |
| समूहवाचक | एक समूह / झुंड का नाम | सेना, कक्षा, भीड़, सभा, झुंड, परिवार, दल, गुच्छा |
🔁 एक भेद, दूसरे की तरह
व्यक्ति → जाति (गुण का प्रतीक): "देश को आज भी भगतसिंहों की ज़रूरत है" (भगतसिंह जैसे वीर) · "वह कलियुग का भीम है" (बहुत बलवान)
जाति → व्यक्ति (एक का नाम बन जाए): नेताजी = सुभाष चंद्र बोस · बापू = गांधीजी · गोस्वामी जी = तुलसीदास · पुरी = जगन्नाथपुरी
भाव → जाति (बहुवचन में): "बुराइयों से बचो" · "अच्छाइयाँ अपनाओ" · "दूरियाँ घटीं"
जाति → व्यक्ति (एक का नाम बन जाए): नेताजी = सुभाष चंद्र बोस · बापू = गांधीजी · गोस्वामी जी = तुलसीदास · पुरी = जगन्नाथपुरी
भाव → जाति (बहुवचन में): "बुराइयों से बचो" · "अच्छाइयाँ अपनाओ" · "दूरियाँ घटीं"
व्यक्तिवाचक संज्ञा प्रायः एकवचन में रहती है; बहुवचन बनते ही (भगतसिंहों) जातिवाचक। भाववाचक का बहुवचन (बुराइयाँ) भी जातिवाचक माना जाता है। द्रव्य और समूह को पुराने व्याकरण (कामताप्रसाद गुरु) जातिवाचक के ही भेद मानते हैं।
भाववाचक संज्ञा बनाना — पाँच स्रोत (मुख्य प्रत्यय: -ता, -त्व, -पन, -पा, -आस, -आहट, -आवट, -आई, -इमा, -ई)
| किससे | उदाहरण (मूल → भाववाचक) |
|---|---|
| जातिवाचक से | मनुष्य → मनुष्यता · बच्चा → बचपन · मित्र → मित्रता · शत्रु → शत्रुता · बूढ़ा → बुढ़ापा · लड़का → लड़कपन · दास → दासता · पशु → पशुता · चोर → चोरी · बंधु → बंधुत्व |
| सर्वनाम से | अपना → अपनापन / अपनत्व · मम → ममता / ममत्व · निज → निजता / निजत्व · सर्व → सर्वस्व · अहं → अहंकार · आप → आपा |
| विशेषण से | मीठा → मिठास · खट्टा → खटास · कड़वा → कड़वाहट · अच्छा → अच्छाई · बड़ा → बड़प्पन · लाल → लालिमा · हरा → हरियाली · मोटा → मोटापा · ठंडा → ठंडक · चतुर → चतुराई · वीर → वीरता · गरीब → गरीबी · लंबा → लंबाई |
| क्रिया से | पढ़ना → पढ़ाई · लिखना → लिखावट · घबराना → घबराहट · थकना → थकान · उड़ना → उड़ान · बहना → बहाव · चलना → चाल · हँसना → हँसी · सजाना → सजावट · गिरना → गिरावट · जीना → जीवन · बचना → बचाव · कमाना → कमाई |
| अव्यय से | दूर → दूरी · निकट → निकटता · समीप → समीपता / सामीप्य · शीघ्र → शीघ्रता · धिक् → धिक्कार · मना → मनाही · शाबाश → शाबाशी · वाहवाह → वाहवाही |
"‘बचपन’ किस प्रकार की संज्ञा है?" (भाववाचक) · "‘सेना’ में कौन-सी संज्ञा?" (समूहवाचक) · "‘मीठा’ की भाववाचक संज्ञा?" (मिठास) · "‘अपनापन’ किस शब्द-भेद से बनी?" (सर्वनाम) · "रेखांकित संज्ञा का भेद: ‘देश को भगतसिंहों की ज़रूरत है’" (व्यक्तिवाचक का जातिवाचक प्रयोग) · "‘सोना’ (धातु) कौन-सी संज्ञा?" (द्रव्यवाचक)
लिंग — पहचान Gender (Ling): How to Identify
हिंदी में दो लिंग हैं: पुल्लिंग और स्त्रीलिंग (संस्कृत का नपुंसकलिंग हिंदी में नहीं)। सबसे पक्की पहचान क्रिया या विशेषण से: "दही खट्टा है" → पुल्लिंग · "चाय ठंडी हो गई" → स्त्रीलिंग।
♂ प्रायः पुल्लिंग
पर्वत (हिमालय) · सागर (हिंद महासागर) · देश (भारत) · ग्रह (सूर्य, चंद्रमा, मंगल — पर पृथ्वी स्त्री.) · दिन (सोमवार) · हिंदी महीने (चैत्र, सावन) · धातु (सोना, लोहा, ताँबा — पर चाँदी स्त्री.) · रत्न (हीरा, मोती, पन्ना — पर मणि स्त्री.) · द्रव (दूध, पानी, घी, तेल, दही — पर चाय, लस्सी स्त्री.) · पेड़ (पीपल, नीम, आम — पर इमली स्त्री.) · अनाज (गेहूँ, चना, धान, जौ, बाजरा — पर ज्वार, अरहर, मूँग स्त्री.) · शरीर के अंग (हाथ, पैर, कान, सिर, दाँत — पर आँख, नाक, जीभ, गर्दन स्त्री.)
♀ प्रायः स्त्रीलिंग
नदियाँ (गंगा, यमुना, कावेरी — पर ब्रह्मपुत्र, सोन पुल्लिंग) · भाषाएँ-बोलियाँ (हिंदी, संस्कृत, अवधी) · लिपियाँ (देवनागरी, रोमन) · तिथियाँ (प्रतिपदा, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या) · नक्षत्र-नाम (अश्विनी, रोहिणी) · मसाले (हल्दी, मिर्च, लौंग, इलायची — पर जीरा, धनिया पुल्लिंग)
दिखने में पुल्लिंग जैसे, पर स्त्रीलिंग: हवा, आग, भूख, प्यास, भीड़, ओस, सड़क, पुस्तक, कलम, सरसों, आत्मा, आयु
दिखने में पुल्लिंग जैसे, पर स्त्रीलिंग: हवा, आग, भूख, प्यास, भीड़, ओस, सड़क, पुस्तक, कलम, सरसों, आत्मा, आयु
प्रत्यय (शब्द का अंत) से पहचान
| पुल्लिंग बनाने वाले अंत | उदाहरण | स्त्रीलिंग बनाने वाले अंत | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| -आव | बहाव, चढ़ाव, बचाव | -ई | रोटी, नदी, टोपी (पर पानी, घी, दही, मोती, हाथी पुल्लिंग) |
| -पन, -पा | बचपन, लड़कपन, बुढ़ापा, मोटापा | -इया | चिड़िया, डिबिया, गुड़िया |
| -त्व | मनुष्यत्व, बंधुत्व, गुरुत्व | -आई, -ता | भलाई, लंबाई; सुंदरता, मित्रता |
| -ना (क्रिया से बनी संज्ञा) | उसका गाना अच्छा है · तैरना अच्छा व्यायाम है (पर तत्सम -ना स्त्रीलिंग: प्रार्थना, रचना, सूचना, कामना, वेदना, चेतना) | -आवट, -आहट | लिखावट, सजावट, घबराहट, चिकनाहट |
| -आर, -एरा (व्यक्ति) | सुनार, लोहार, लुटेरा, सपेरा (पर दीवार, तलवार, कतार, बहार, धार स्त्रीलिंग) | -इमा, -ति, -आस, -औती | लालिमा, महिमा · शांति, रीति · मिठास, प्यास · मनौती, कटौती, चुनौती, बपौती |
🔒 नित्य लिंग (= जिनका दूसरा लिंग-रूप नहीं बनता)नित्य पुल्लिंग: खटमल, उल्लू, कौआ, भेड़िया, मच्छर, गीदड़ → मादा के लिए "मादा खटमल"
नित्य स्त्रीलिंग: कोयल, मछली, मैना, चील, तितली → नर के लिए "नर कोयल"
नित्य स्त्रीलिंग: कोयल, मछली, मैना, चील, तितली → नर के लिए "नर कोयल"
⚠️ उलझने वाले शब्दपुल्लिंग: दही, मोती, आँसू, प्राण, पानी, घी, हाथी
स्त्रीलिंग: आत्मा, आयु, ओस, सरसों, अरहर, ज्वार, भीड़, दीवार, तलवार
स्त्रीलिंग: आत्मा, आयु, ओस, सरसों, अरहर, ज्वार, भीड़, दीवार, तलवार
"स्त्रीलिंग चुनो: दही / मोती / आत्मा / पानी" (आत्मा) · "पुल्लिंग चुनो: ओस / आँसू / भीड़ / सरसों" (आँसू) · "‘खटमल’ कैसा शब्द?" (नित्य पुल्लिंग) · "नदियों के नाम प्रायः किस लिंग में? अपवाद?" (स्त्रीलिंग; ब्रह्मपुत्र, सोन) · "‘चुनौती’ का लिंग?" (स्त्रीलिंग)
लिंग — परिवर्तन Gender (Ling): Masculine to Feminine
प्रत्यय से लिंग परिवर्तन (पुल्लिंग → स्त्रीलिंग)
| नियम | उदाहरण | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अ/आ → ई | लड़का-लड़की, बेटा-बेटी, देव-देवी, पुत्र-पुत्री, नाना-नानी, बकरा-बकरी | -अक → -इका | लेखक-लेखिका, गायक-गायिका, बालक-बालिका, अध्यापक-अध्यापिका |
| आ → इया | बूढ़ा-बुढ़िया, चूहा-चुहिया, कुत्ता-कुतिया, डिब्बा-डिबिया, बेटा-बिटिया | -ता → -त्री | दाता-दात्री, नेता-नेत्री, कर्ता-कर्त्री, विधाता-विधात्री |
| -इन | धोबी-धोबिन, माली-मालिन, नाग-नागिन, सुनार-सुनारिन, ग्वाला-ग्वालिन, मालिक-मालकिन, दूल्हा-दुलहिन | -वान → -वती | बलवान-बलवती, गुणवान-गुणवती, भगवान-भगवती |
| -आनी | देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी, सेठ-सेठानी, नौकर-नौकरानी, इंद्र-इंद्राणी | -मान → -मती | श्रीमान-श्रीमती, बुद्धिमान-बुद्धिमती, आयुष्मान-आयुष्मती |
| -नी / -इनी | शेर-शेरनी, मोर-मोरनी, ऊँट-ऊँटनी, हंस-हंसिनी, हाथी-हथिनी | संस्कृत -आ | छात्र-छात्रा, सुत-सुता, प्रिय-प्रिया, शिष्य-शिष्या, बाल-बाला |
| -आइन | पंडित-पंडिताइन, ठाकुर-ठकुराइन, चौधरी-चौधराइन | -ई → -इनी | तपस्वी-तपस्विनी, स्वामी-स्वामिनी, यशस्वी-यशस्विनी |
| -उ → -उणी | भिक्षु-भिक्षुणी | आ → ई (रिश्ते) | सखा-सखी, मामा-मामी, चाचा-चाची |
🔀 बिलकुल अलग शब्द (परीक्षा के प्रिय)पिता-माता · भाई-बहन · राजा-रानी · पुरुष-स्त्री · नर-नारी · वर-वधू · बैल-गाय · ससुर-सास · पति-पत्नी · युवक-युवती · विधुर-विधवा · कवि-कवयित्री · विद्वान-विदुषी · सम्राट-सम्राज्ञी · साधु-साध्वी · बादशाह-बेगम · नर-मादा (पशु-पक्षी)
अशुद्ध → शुद्ध: कवियित्री, कवित्री ✗ → कवयित्री · विद्वानी ✗ → विदुषी · सम्राटनी ✗ → सम्राज्ञी · ‘बेटा’ के दोनों रूप सही: बेटी (सामान्य), बिटिया (प्यार/छोटापन)।
प्रश्न: ‘ग्वाला’ का स्त्रीलिंग? → -इन प्रत्यय → ग्वालिन
प्रश्न: ‘भिक्षु’ का स्त्रीलिंग? → संस्कृत रीति → भिक्षुणी
प्रश्न: ‘नेता’ का स्त्रीलिंग? → -ता → -त्री → नेत्री (नेतिन ✗)
प्रश्न: ‘भिक्षु’ का स्त्रीलिंग? → संस्कृत रीति → भिक्षुणी
प्रश्न: ‘नेता’ का स्त्रीलिंग? → -ता → -त्री → नेत्री (नेतिन ✗)
संस्कृत (तत्सम) शब्दों में संस्कृत प्रत्यय: -इका, -त्री, -वती, -मती, -आ, -इनी। ठेठ हिंदी शब्दों में हिंदी प्रत्यय: -ई, -इया, -इन, -नी, -आनी, -आइन।
"‘कवि’ का स्त्रीलिंग?" (कवयित्री) · "‘विद्वान’ का स्त्रीलिंग?" (विदुषी) · "‘मालिक’ का स्त्रीलिंग?" (मालकिन) · "‘दूल्हा’ का स्त्रीलिंग?" (दुलहिन) · "‘सम्राट’ का स्त्रीलिंग?" (सम्राज्ञी) · "अशुद्ध जोड़ा चुनो: कवि-कवियित्री / नेता-नेत्री / साधु-साध्वी" (कवि-कवियित्री)
वचन — नियम Number (Vachan)
वचन = शब्द का वह रूप जिससे एक या अनेक का पता चले। हिंदी में 2 वचन: एकवचन, बहुवचन (संस्कृत में द्विवचन भी)। आकारांत = जिसके अंत में ‘आ’ (लड़का) · अकारांत = जिसके अंत में ‘अ’ (बात)
बिना विभक्ति (मूल रूप) — एकवचन → बहुवचन
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| आकारांत पुल्लिंग: आ → ए | लड़का → लड़के · घोड़ा → घोड़े · कमरा → कमरे (पर रिश्ते / आदर वाले नहीं बदलते: पिता, चाचा, मामा, नाना, राजा, योद्धा) |
| अकारांत स्त्रीलिंग: → एँ | बात → बातें · रात → रातें · आँख → आँखें · पुस्तक → पुस्तकें · बहन → बहनें |
| आकारांत स्त्रीलिंग: → आएँ | माता → माताएँ · कथा → कथाएँ · लता → लताएँ |
| इ / ई अंत स्त्रीलिंग: → इयाँ | नदी → नदियाँ · लड़की → लड़कियाँ · तिथि → तिथियाँ · नीति → नीतियाँ |
| -इया अंत स्त्रीलिंग: या → याँ (केवल चंद्रबिंदु ँ जुड़ता है) | चिड़िया → चिड़ियाँ · गुड़िया → गुड़ियाँ · डिबिया → डिबियाँ |
| उ / ऊ अंत स्त्रीलिंग: → एँ (ऊ ह्रस्व = छोटा ‘उ’ बनता है) | वस्तु → वस्तुएँ · बहू → बहुएँ · धेनु → धेनुएँ |
| अन्य पुल्लिंग नहीं बदलते | एक फल - दो फल · बालक, घर, हाथी, साधु, मुनि (क्रिया से पता चलता है) |
| समूह-शब्द जोड़कर | छात्रगण · गुरुजन · पाठकवृंद · अध्यापक वर्ग · आप लोग · सेना दल |
विभक्ति (ने, को, से, में…) लगने पर — तिर्यक रूप (= विभक्ति से पहले बदला हुआ रूप)
| स्थिति | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकवचन + विभक्ति | आकारांत पुल्लिंग का आ → ए | लड़के ने खाया · घोड़े पर बैठा · कमरे में (लड़का ने ✗) |
| बहुवचन + विभक्ति | → ओं (इ/ई → इयों) | लड़कों ने · घरों में · नदियों का · माताओं को · बहुओं से |
| संबोधन बहुवचन | → ओ (बिंदु नहीं) | बच्चो! · भाइयो और बहनो! · मित्रो! (बच्चों!, भाइयों! ✗) |
सदा बहुवचनप्राण, होश, हस्ताक्षर, दाम, लोग: "मेरे प्राण सूख गए", "उसके होश उड़ गए"
प्रायः बहुवचन: आँसू, दर्शन ("आपके दर्शन हुए")
प्रायः बहुवचन: आँसू, दर्शन ("आपके दर्शन हुए")
सदा एकवचनद्रव्य और भाव: पानी, दूध, घी, सोना, जनता, प्रेम, क्रोध, सत्य: "जनता आ रही है"
आदर में बहुवचनएक व्यक्ति पर भी: "पिताजी आ रहे हैं" · "गुरुजी पढ़ा रहे हैं" · "आप कब आए?"
प्रश्न: शुद्ध रूप: ‘लड़का ने गाना गाया’ या ‘लड़के ने गाना गाया’? → विभक्ति ‘ने’ लगी, आकारांत पुल्लिंग एकवचन → आ → ए → लड़के ने।
प्रश्न: ‘गुड़िया’ का बहुवचन? → -इया → -इयाँ → गुड़ियाँ (गुड़ियाएँ ✗)
प्रश्न: ‘गुड़िया’ का बहुवचन? → -इया → -इयाँ → गुड़ियाँ (गुड़ियाएँ ✗)
"‘माता’ का बहुवचन?" (माताएँ) · "शुद्ध संबोधन: भाइयो / भाइयों?" (भाइयो) · "कौन-सा शब्द सदा बहुवचन?" (प्राण, हस्ताक्षर) · "‘बहू’ का बहुवचन?" (बहुएँ) · "‘मामा’ का बहुवचन?" (मामा — नहीं बदलता) · "कौन-सा शब्द सदा एकवचन?" (जनता, पानी)
कारक — 8 भेद और विभक्ति चिह्न Case (Karak)
संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया से (या दूसरे शब्दों से) संबंध बताने वाला रूप कारक है; उसे बताने वाले शब्द (ने, को, से…) विभक्ति / परसर्ग हैं। हिंदी में 8 कारक माने जाते हैं।
| कारक | संस्कृत विभक्ति | चिह्न | प्रश्न | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1. कर्ता | प्रथमा | ने (या शून्य) | कौन? | राम ने फल खाया · सीता गाती है |
| 2. कर्म | द्वितीया | को (या शून्य) | किसे / क्या? | माँ ने बच्चे को बुलाया · मैंने पत्र लिखा |
| 3. करण | तृतीया | से, के द्वारा (साधन) | किससे? | वह कलम से लिखता है · बस द्वारा आया |
| 4. संप्रदान | चतुर्थी | को, के लिए (देना) | किसके लिए? | गरीबों को कंबल दो · बच्चों के लिए दूध लाओ |
| 5. अपादान | पंचमी | से (अलग होना) | किससे अलग? | पेड़ से पत्ता गिरा · गंगा हिमालय से निकलती है |
| 6. संबंध | षष्ठी | का, के, की; रा, रे, री; ना, ने, नी | किसका? | राम का घर · मेरी किताब · अपना देश |
| 7. अधिकरण | सप्तमी | में, पर | कहाँ? | पानी में मछली · छत पर बंदर |
| 8. संबोधन | संबोधन (प्रथमा का ही रूप) | हे, अरे, ओ, अजी (!) | — | हे प्रभु! रक्षा करो · अरे बच्चो! सुनो |
संबंध (राम का घर) और संबोधन (हे राम!) का क्रिया से सीधा संबंध नहीं होता — संबंध एक संज्ञा को दूसरी संज्ञा से जोड़ता है, संबोधन केवल पुकार है। इसलिए संस्कृत इन्हें कारक नहीं मानती (वहाँ 6 कारक), फिर भी हिंदी व्याकरण 8 कारक गिनता है — परीक्षा में उत्तर 8।
‘ने’ कब लगता है?सकर्मक क्रिया के भूतकालिक रूप (सामान्य, आसन्न, पूर्ण, संदिग्ध भूत) में: राम ने खाना खाया / खाया है / खाया था / खाया होगा।
हेतुहेतुमद् भूत में भी जब क्रिया ‘-आ/-ई + होता/होती’ रूप में हो: "यदि उसने मेहनत की होती तो पास हो जाता।"
अकर्मक में नहीं: राम आया (राम ने आया ✗)। अपूर्ण भूत में नहीं: राम खाना खा रहा था।
‘ने’ लगने पर क्रिया कर्म के लिंग-वचन से: राम ने रोटी खाई, सीता ने फल खाया।
हेतुहेतुमद् भूत में भी जब क्रिया ‘-आ/-ई + होता/होती’ रूप में हो: "यदि उसने मेहनत की होती तो पास हो जाता।"
अकर्मक में नहीं: राम आया (राम ने आया ✗)। अपूर्ण भूत में नहीं: राम खाना खा रहा था।
‘ने’ लगने पर क्रिया कर्म के लिंग-वचन से: राम ने रोटी खाई, सीता ने फल खाया।
‘ने’ के अपवादसकर्मक होकर भी ‘ने’ नहीं: लाना, भूलना और सहायक सकना, चुकना — "वह किताब लाया" · "मैं सबक भूला" · "वह खाना खा चुका"।
अकर्मक होकर भी प्रायः ‘ने’: छींकना, थूकना, खाँसना, नहाना (उसने छींका)।
अकर्मक होकर भी प्रायः ‘ने’: छींकना, थूकना, खाँसना, नहाना (उसने छींका)।
परीक्षा-कुंजियों में बोलना, बकना भी प्रायः ‘ने’ रहित गिने जाते हैं ("वह बोला", "वह बकता रहा"); पर कर्म हो तो प्रयोग में ‘ने’ मिलता है ("उसने झूठ बोला")।
✍️ परसर्ग कैसे लिखें?संज्ञा से अलग: राम ने, घर में, पेड़ से · सर्वनाम से मिलाकर: उसने, मुझको, आपके, तुमसे, इसमें · दो परसर्ग हों तो पहला मिला, दूसरा अलग: उसके लिए, आपके द्वारा · संबंध का चिह्न आगे वाले शब्द का लिंग-वचन लेता है: राम का घर, राम की बहन, राम के बेटे
"‘पेड़ से पत्ता गिरा’ में कौन-सी विभक्ति?" (पंचमी — अपादान) · "‘ने’ किस कारक का चिह्न?" (कर्ता) · "हिंदी में कारक कितने?" (8) · "किन दो कारकों का क्रिया से सीधा संबंध नहीं?" (संबंध, संबोधन) · "रिक्त स्थान: मोहन ___ पुस्तक पढ़ी" (ने) · "‘ने’ रहित वाक्य चुनो: वह किताब लाया / उसने किताब पढ़ी" (लाया)
कारक — पहचान के नियम Identifying Karak
‘से’ — करण या अपादान?साधन (जिसकी मदद से काम हो) → करण: चाकू से फल काटा, आँखों से देखा, बस से आया
अलग होना → अपादान: छत से गिरा, घर से निकला
अपादान के और अर्थ: डरना (चूहा बिल्ली से डरता है) · तुलना (राम श्याम से लंबा है) · दूरी (दिल्ली से आगरा दूर है) · निकलना (कुएँ से पानी) · सीखना / लजाना (गुरु से सीखा; बहू ससुर से लजाती है)
अलग होना → अपादान: छत से गिरा, घर से निकला
अपादान के और अर्थ: डरना (चूहा बिल्ली से डरता है) · तुलना (राम श्याम से लंबा है) · दूरी (दिल्ली से आगरा दूर है) · निकलना (कुएँ से पानी) · सीखना / लजाना (गुरु से सीखा; बहू ससुर से लजाती है)
‘को’ — कर्म या संप्रदान?जिस पर क्रिया का फल पड़े → कर्म: पुलिस ने चोर को पकड़ा, मोहन को बुलाओ
जिसे कुछ दिया जाए या जिसके लिए काम हो → संप्रदान: भिखारी को रोटी दो
समय के साथ ‘को’ = अधिकरण: रात को आना (रात में)
जिसे कुछ दिया जाए या जिसके लिए काम हो → संप्रदान: भिखारी को रोटी दो
समय के साथ ‘को’ = अधिकरण: रात को आना (रात में)
कर्मवाच्य / भाववाच्य में कर्ता: "राम द्वारा पत्र लिखा गया", "मुझसे चला नहीं जाता" — यहाँ कर्ता के साथ लगे से / के द्वारा को परीक्षा-कुंजियाँ प्रायः करण कारक मानती हैं (संस्कृत में भी ऐसा कर्ता तृतीया में: रामेण)। कुछ पुस्तकें इसे कर्ता ही कहती हैं — विकल्पों में करण हो तो करण चुनो।
एक वाक्य में सभी कारक
हे बालको! (संबोधन) राजा ने (कर्ता) अपने हाथों से (करण) भंडार से (अपादान) निकालकर गरीबों के लिए (संप्रदान) मंदिर में (अधिकरण) राज्य का (संबंध) अनाज (कर्म) बाँटा।
कारक पहचानो — परीक्षा के प्रिय वाक्य
| वाक्य (मोटा पद) | कारक | वाक्य (मोटा पद) | कारक |
|---|---|---|---|
| किसान हल से खेत जोतता है | करण (साधन) | वह साँप से डरता है | अपादान (डर) |
| वह पैरों से लँगड़ा है | करण (अंग-दोष) | भूखे को भोजन दो | संप्रदान (देना) |
| लड़के मैदान में खेल रहे हैं | अधिकरण | पिता ने पुत्र को डाँटा | कर्म |
| राम श्याम से लंबा है | अपादान (तुलना) | पुलिस द्वारा चोर पकड़ा गया | करण (कर्मवाच्य का कर्ता) |
"ने-कर्ता, को-कर्म, से-करण (साधन), के लिए-संप्रदान, से-अपादान (जुदाई), का-के-की-संबंध, में-पर-अधिकरण, हे-अरे-संबोधन"। ‘से’ के साथ पूछो: साधन या अलगाव?
"‘वह चाकू से फल काटता है’ में कारक?" (करण) · "‘पेड़ से पत्ते गिरते हैं’?" (अपादान) · "‘राम श्याम से लंबा है’ में ‘से’?" (अपादान — तुलना) · "‘राम द्वारा रावण मारा गया’ में ‘राम द्वारा’?" (करण) · "‘हे भगवान!’ में कारक?" (संबोधन) · "‘रात को आना’ में ‘को’?" (अधिकरण — समय)