Chapter 4 · Hindi Grammar
समास — परिभाषा, 6 भेद
Samas: Compound Words🧩 समासदो या अधिक पदों को जोड़कर छोटा नया शब्द बनाना; बीच के विभक्ति-चिह्न (का, से, में…) हट जाते हैं।
📦 समस्त पदसमास से बना शब्द: राजपुत्र। पहला पद = पूर्वपद (राज), दूसरा = उत्तरपद (पुत्र)।
✂️ विग्रहसमस्त पद को खोलकर लिखना: राजपुत्र = राजा का पुत्र।
पद-प्रधानता से पहचानो: पहला प्रधान → अव्ययीभाव · दूसरा प्रधान → तत्पुरुष / कर्मधारय / द्विगु · दोनों → द्वंद्व · कोई नहीं (तीसरा अर्थ) → बहुव्रीहि।
1. अव्ययीभाव समास
पहचानपहला पद अव्यय (यथा, प्रति, आ, भर, बे, यावत्) और पूरा शब्द अव्यय (क्रियाविशेषण) की तरह काम करे — रूप नहीं बदलता। दोहराहट भी (घर-घर)। अधर्म अव्ययीभाव नहीं (नञ्)।
| समस्त पद | विग्रह |
|---|---|
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन / हर दिन |
| आजीवन / आमरण | जीवन भर / मरण तक |
| यावज्जीवन | जब तक जीवन है |
| भरपेट · बेखटके | पेट भरकर · बिना खटके |
| हाथोंहाथ · रातोंरात | हाथ ही हाथ में · रात ही रात में |
| घर-घर · यथासंभव | हर घर · जितना संभव हो |
2. तत्पुरुष समास — विभक्ति (कारक चिह्न) का लोप
| भेद (विभक्ति) | लुप्त चिह्न | उदाहरण (विग्रह) |
|---|---|---|
| कर्म (द्वितीया) | को | स्वर्गप्राप्त (स्वर्ग को प्राप्त) · गगनचुंबी (गगन को चूमने वाला) · माखनचोर · जेबकतरा |
| करण (तृतीया) | से / के द्वारा | हस्तलिखित (हाथ से लिखा) · तुलसीकृत (तुलसी द्वारा रचित) · रेखांकित · शोकाकुल |
| संप्रदान (चतुर्थी) | के लिए | रसोईघर (रसोई के लिए घर) · गुरुदक्षिणा · विद्यालय (विद्या के लिए आलय) |
| अपादान (पंचमी) | से (अलग होना) | पथभ्रष्ट (पथ से भ्रष्ट) · धनहीन · ऋणमुक्त · रोगमुक्त · देशनिकाला |
| संबंध (षष्ठी) | का, के, की | राजपुत्र (राजा का पुत्र) · गंगाजल · राष्ट्रपति · सेनापति · पराधीन |
| अधिकरण (सप्तमी) | में, पर | वनवास (वन में वास) · आपबीती (आप पर बीती) · घुड़सवार · पुरुषोत्तम (पुरुषों में उत्तम) |
| नञ् तत्पुरुष | ‘न’ का भाव | असत्य (न सत्य) · अधर्म · अनपढ़ · नापसंद · अनुचित |
"‘यथाशक्ति’ में कौन-सा समास?" (अव्ययीभाव) · "‘हस्तलिखित’ का विग्रह?" · "‘पथभ्रष्ट’ में कौन-सा तत्पुरुष?" (अपादान) · "‘रसोईघर’ का समास?" (संप्रदान तत्पुरुष) · "किस समास में पूर्वपद प्रधान होता है?"
कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि Karmadharay, Dvigu, Dvandva, Bahuvrihi
3. कर्मधारयभेद: विशेषण-विशेष्य (नीलकमल) · उपमान-उपमेय (चंद्रमुख — पहले उपमान) · रूपक (करकमल, विद्याधन — ‘रूपी’)।
नीलकमल — नीला है जो कमल · महात्मा — महान है जो आत्मा · सज्जन — सत् (अच्छा) है जो जन · परमानंद — परम है जो आनंद
चंद्रमुख — चंद्र के समान मुख · कमलनयन — कमल के समान नयन · करकमल — कर रूपी कमल · विद्याधन — विद्या रूपी धन · क्रोधाग्नि — क्रोध रूपी अग्नि
नीलकमल — नीला है जो कमल · महात्मा — महान है जो आत्मा · सज्जन — सत् (अच्छा) है जो जन · परमानंद — परम है जो आनंद
चंद्रमुख — चंद्र के समान मुख · कमलनयन — कमल के समान नयन · करकमल — कर रूपी कमल · विद्याधन — विद्या रूपी धन · क्रोधाग्नि — क्रोध रूपी अग्नि
4. द्विगुपहला पद संख्यावाचक, विग्रह में प्रायः ‘समूह / समाहार’।
चौराहा — चार राहों का समूह · त्रिभुवन — तीन भुवनों का समूह · पंचवटी — पाँच वटों का समूह · सप्ताह — सात दिनों का समूह · नवरत्न · शताब्दी — सौ वर्षों का समूह · दोपहर · त्रिफला · नवग्रह · सप्तर्षि · अठन्नी · चौमासा
चौराहा — चार राहों का समूह · त्रिभुवन — तीन भुवनों का समूह · पंचवटी — पाँच वटों का समूह · सप्ताह — सात दिनों का समूह · नवरत्न · शताब्दी — सौ वर्षों का समूह · दोपहर · त्रिफला · नवग्रह · सप्तर्षि · अठन्नी · चौमासा
5. द्वंद्वदोनों पद प्रधान; विग्रह में और / या / आदि; प्रायः योजक चिह्न (-)।
इतरेतर (और): माता-पिता, राम-लक्ष्मण, भाई-बहन, अन्न-जल
वैकल्पिक (या — प्रायः विरोधी जोड़े): भला-बुरा, थोड़ा-बहुत, पाप-पुण्य, लाभ-हानि
समाहार (आदि): दाल-रोटी (दाल, रोटी आदि), हाथ-पाँव, रुपया-पैसा
इतरेतर (और): माता-पिता, राम-लक्ष्मण, भाई-बहन, अन्न-जल
वैकल्पिक (या — प्रायः विरोधी जोड़े): भला-बुरा, थोड़ा-बहुत, पाप-पुण्य, लाभ-हानि
समाहार (आदि): दाल-रोटी (दाल, रोटी आदि), हाथ-पाँव, रुपया-पैसा
6. बहुव्रीहिदोनों पद मिलकर किसी तीसरे (व्यक्ति/वस्तु) की ओर संकेत करें; विग्रह में ‘जिसका / जिसके / जो’।
दशानन — दस हैं आनन जिसके (रावण) · लंबोदर — लंबा है उदर जिसका (गणेश) · नीलकंठ — नीला है कंठ जिसका (शिव) · चक्रपाणि — चक्र है हाथ में जिसके (विष्णु) · पीतांबर — पीले हैं वस्त्र जिसके (कृष्ण) · गजानन (गणेश) · वीणापाणि (सरस्वती) · चंद्रशेखर, त्रिनेत्र (शिव) · गिरिधर, मुरलीधर (कृष्ण; कुछ पुस्तकों में उपपद तत्पुरुष)
दशानन — दस हैं आनन जिसके (रावण) · लंबोदर — लंबा है उदर जिसका (गणेश) · नीलकंठ — नीला है कंठ जिसका (शिव) · चक्रपाणि — चक्र है हाथ में जिसके (विष्णु) · पीतांबर — पीले हैं वस्त्र जिसके (कृष्ण) · गजानन (गणेश) · वीणापाणि (सरस्वती) · चंद्रशेखर, त्रिनेत्र (शिव) · गिरिधर, मुरलीधर (कृष्ण; कुछ पुस्तकों में उपपद तत्पुरुष)
सबसे ज़्यादा उलझने वाले जोड़े ⚠️
| समस्त पद | विग्रह 1 → समास | विग्रह 2 → समास |
|---|---|---|
| नीलकंठ | नीला है जो कंठ → कर्मधारय | नीला है कंठ जिसका (शिव) → बहुव्रीहि |
| पीतांबर | पीला है जो अंबर (वस्त्र) → कर्मधारय | पीले हैं वस्त्र जिसके (कृष्ण) → बहुव्रीहि |
| चतुर्भुज | चार भुजाओं का समूह (आकृति) → द्विगु | चार हैं भुजाएँ जिसकी (विष्णु) → बहुव्रीहि |
समास पहचानने का क्रम 🧭
"‘नीलकंठ’ (शिव) में कौन-सा समास?" (बहुव्रीहि) · "‘चतुर्भुज’ आकृति के अर्थ में?" (द्विगु) · "‘सप्ताह’ का विग्रह?" · "‘दाल-रोटी’ किस द्वंद्व का उदाहरण?" (समाहार) · "‘करकमल’ का विग्रह?" (कर रूपी कमल)
समास पहचान — अभ्यास Identifying Samas
विग्रह में विशेष नाम (शिव, कृष्ण) → बहुव्रीहि; गुण/तुलना → कर्मधारय; संख्या का समूह → द्विगु। उत्तर विग्रह पर निर्भर है (विद्यालय: ‘के लिए’ → संप्रदान, ‘का’ → संबंध)। अर्थ न दिया हो तो प्रचलित: दशानन, लंबोदर, गजानन = बहुव्रीहि; अनाथ, निर्धन, अनादि (नहीं है नाथ/धन/आदि जिसका) प्रायः बहुव्रीहि; निर्भय कुछ पुस्तकों में अव्ययीभाव।
🔗 संधि बनाम समास
एक शब्द में दोनों हो सकते हैं: विद्यालय = विद्या + आलय (दीर्घ संधि) = विद्या के लिए आलय (तत्पुरुष)।
| संधि | समास |
|---|---|
| वर्णों का मेल | पदों (शब्दों) का मेल |
| तोड़ना = विच्छेद | खोलना = विग्रह |
| हिम + आलय | हिम का आलय |
प्रश्न: ‘त्रिभुवन’ में समास? → तीन भुवनों का समूह → द्विगु
प्रश्न: ‘माता-पिता’? → माता और पिता → द्वंद्व
प्रश्न: ‘लंबोदर’? → लंबा है उदर जिसका (गणेश) → बहुव्रीहि
प्रश्न: ‘चंद्रमुख’? → चंद्र के समान मुख → कर्मधारय
प्रश्न: ‘माता-पिता’? → माता और पिता → द्वंद्व
प्रश्न: ‘लंबोदर’? → लंबा है उदर जिसका (गणेश) → बहुव्रीहि
प्रश्न: ‘चंद्रमुख’? → चंद्र के समान मुख → कर्मधारय
द्विगु और कर्मधारय दोनों में उत्तरपद प्रधान होता है, इसलिए कई व्याकरण इन्हें तत्पुरुष के ही उपभेद मानते हैं। परीक्षा में इन्हें अलग समास (कुल 6) माना जाता है।
तत्पुरुष के दो और रूप
उपपद तत्पुरुषदूसरा पद अकेले प्रयोग न हो (कृदंत): ग्रंथकार, कुंभकार, जलज (जल में जन्मा), कृतघ्न
मध्यमपदलोपीबीच का पद लुप्त: दहीबड़ा (दही में डूबा बड़ा), पर्णकुटी (पत्तों से बनी कुटी)
समास पहचानो — परीक्षा के प्रिय शब्द
| शब्द | विग्रह | समास | शब्द | विग्रह | समास |
|---|---|---|---|---|---|
| यथाविधि | विधि के अनुसार | अव्ययीभाव | महात्मा | महान है जो आत्मा | कर्मधारय |
| प्रत्येक | हर एक | अव्ययीभाव | घनश्याम | घन के समान श्याम | कर्मधारय |
| गंगाजल | गंगा का जल | संबंध तत्पुरुष | पंचवटी | पाँच वटों का समूह | द्विगु |
| वनवास | वन में वास | अधिकरण तत्पुरुष | नवरत्न | नौ रत्नों का समूह | द्विगु |
| तुलसीकृत | तुलसी द्वारा रचित | करण तत्पुरुष | भला-बुरा | भला या बुरा | द्वंद्व |
| धनहीन | धन से हीन | अपादान तत्पुरुष | गजानन | गज का आनन है जिसका (गणेश) | बहुव्रीहि |
| आमरण | मरण तक | अव्ययीभाव | त्रिफला | तीन फलों का समाहार | द्विगु |
| कलाप्रवीण | कला में प्रवीण | अधिकरण तत्पुरुष | भाई-बहन | भाई और बहन | द्वंद्व |
| अनपढ़ | न पढ़ा | नञ् तत्पुरुष | वीणापाणि | वीणा है हाथ में जिसके (सरस्वती) | बहुव्रीहि |
"‘दशानन’ में कौन-सा समास?" (बहुव्रीहि) · "‘चौराहा’ का विग्रह?" · "‘नीलकमल’ में समास?" (कर्मधारय) · "द्वंद्व समास का उदाहरण चुनो" · "‘पीतांबर’ का बहुव्रीहि विग्रह?" · "संधि और समास में अंतर?" · "किस समास में दोनों पद प्रधान?"